ओलंपिक में देश को तीन बार गोल्ड मेडल दिलाने वाले दिग्गज हॉकी खिलाड़ी बलबीर सिंह सीनियर को पंजाब यूनिवर्सिटी के खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। यूनिवर्सिटी की ओर से पहली बार खेल रत्न पुरस्कार देने की शुरुआत हो रही है।
उन्हें 13 मार्च को पीयू के दीक्षांत समारोह के दौरान यह सम्मान दिया जाएगा। पीयू के इतिहास में पहली बार खेल से जुड़ी महान हस्ती को यह सम्मान मिल रहा है। इस बात से बलबीर सिंह सीनियर के परिवार में खुशी का माहौल है। उनकी बेटी सुशबीर कौर ने इसकी पुष्टि की है।
उन्होंने बताया कि पीयू की ओर से सम्मान देने के लिए पत्र आया था। सुशबीर कौर ने बताया कि उनके पिता बलबीर सिंह सीनियर इस समय कनाडा में बेटों के पास हैं। उनके तीन बेटे कनाडा में रहते हैं। वह अगले महीने दूसरे हफ्ते तक देश लौट आएंगे।
इसके बाद पंजाब यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में खेल रत्न पुरस्कार लेने जाएंगे। इस संबंध में पीयू की रजिस्ट्रार जीएस चड्डा ने बताया कि सिंडीकेट बैठक में पहली बार खेल रत्न देने पर फैसला लिया गया था। इससे पहले हर साल उद्योग, विज्ञान और साहित्य रत्न पुरस्कार दिया जाता रहा है।
जीते जी ओलंपिक में जीते गोल्ड
सुशबीर कौर ने बताया कि उनके पिता का सपना है कि उनके जीते जी भारत ओलंपिक में गोल्ड मेडल जरूर जीते। उनके दिमाग में आज भी हाकी ही घूमती रहती है। उन्होंने पंजाब में डायरेक्टर स्पोर्ट्स के पद पर 21 साल रहे, इस दौरान उन्होंने खेल के विकास के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए।
उन्होंने पद पर रहते हुए उस समय महाराजा रंजीत सिंह अवार्ड, समर कैंप और कई अन्य अवार्ड शुरू किए थे, जो आज भी चल रहे हैं। पिता को खेल रत्न सम्मान मिलने पर कनाडा और चंडीगढ़ में उनके परिवार वालों में खुशी का माहौल है।
हाकी के दिग्गज खिलाड़ी और ओलंपियन को पीयू खेल रत्न से सम्मानित कर रहा है। यह हमारे लिए गर्व की बात है।
-डॉ. परमिंदर सिंह, पीयू डायरेक्टर स्पोर्ट्स
मार्च में पंजाब यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में पहली बार यूनिवर्सिटी की ओर से खेल रत्न पुरस्कार दिया जा रहा है।
- जीएस चड्डा, रजिस्ट्रार, पंजाब यूनिवर्सिटी
यह हैं उपलब्धियां
ओलंपिक में देश को तीन बार गोल्ड मेडल दिला चुके हैं। पहली बार 1948 लंदन ओलंपिक में वह भारतीय हाकी टीम के सदस्य रहे। दूसरी बार फिनलैंड के हेलसिंकी में 1952 में टीम के उपकप्तान रहे और तीसरी बार 1956 में मेलबोर्न ओलंपिक टीम के कप्तान रहते हुए गोल्ड मेडल दिलाया।