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यौन शोषण के दोषी असिस्टेंट प्रोफेसर को पीयू ने नौकरी से हटाया, पर एक राहत भी दी

Mon, 28 May 2018 10:56 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
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नौकरी से हटाया
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छात्राओं का यौन शोषण करने वाले असिस्टेंट प्रोफेसर कोमल सिंह को पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ ने नौकरी से बर्खास्त कर दिया है। रविवार को तीन घंटे तक चली हंगामेदार बैठक में पंजाब यूनिवर्सिटी की सीनेट में यह फैसला लिया गया। सीनेट में वीसी की तरफ से दो तरह की सजा का प्रावधान रखा गया था। पहला दोषी को बर्खास्तगी के साथ भविष्य में कहीं पर भी नौकरी करने पर रोक लगा दी जाए या सिर्फ बर्खास्त किया जाए और भविष्य में पीयू के अलावा किसी अन्य संस्थान में आवेदन पर रोक न लगाई जाए।
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सीनेट सदस्यों ने बर्खास्तगी का प्रस्ताव पास किया, लेकिन भविष्य में कहीं और नौकरी नहीं करने पर रोक नहीं लगाई। गत एक अप्रैल को हुई सीनेट में डिमोशन या यूनिवर्सिटी से रिमूवल पर वोट कराई गई थी लेकिन किसी भी प्वाइंट पर वन थर्ड वोट नहीं आए। सीनेट में मामला उठा कि वोट के राजनीति पर दोषी को सजा से बचा लिया गया। इसके बाद पंजाब यूनिवर्सिटी कमेटी अंगेस्ट सेक्सुअल हरासमेंट (पीयूकैश) ने पीयू प्रबंधन को पत्र लिखकर कहा कि जब किसी को दोषी दिया जा चुका है तो उसे ऐसे कैसे सजा के बगैर छोड़ दिया गया। इसके बाद मामला फिर से सीनेट में आया। इस बार सिर्फ दो ही सजा का प्रावधान रखा गया और एक मद्द पर फैसला सुनाया गया।

क्या है मामला
असिस्टेंट प्रोफेसर कोमल सिंह के खिलाफ 2015 से यौन प्रताड़ना की शिकायतों का दौर चल रहा है। उसके खिलाफ यौन प्रताड़ना के चार मामले आए। एक छात्रा को अभद्र तरीके से संबोधित करना और अश्लील शब्द कहना, जबकि दूसरा मामला एक छात्रा को बालों से खींचने का है। इन दोनों ही मामलों में कोमल सिंह दोषी करार दिया जा चुका था जबकि एक प्रताड़ना की शिकायत वापस हो चुकी है और शराब के नशे में क्लास में आकर छात्रा को छेड़ने की भी जांच पूरी हो चुकी है। पिछले साल 24 सितंबर को कोमल सिंह को सस्पेंड कर दिया गया गया था, लेकिन सजा पर फैसला अब तीन साल बाद आया।
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सीनेट में आई कुछ ऐसी दलीलें
सीनेटर डॉ. अजय रंगा ने दलील देते हुए कहा कि कोमल सिंह के परिवार के बारे में सोचा जाए। यौन शोषण के सभी मामलों में एक जैसा रवैया क्यों नहीं है? उन्होंने वीसी को कहा कि आप पर भी यौन प्रताड़ना के आरोप हैं और दुनिया में पीयू की बदनामी हो रही है।

-भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं सीनेट सदस्य संजय टंडन ने कहा कि क्या यहां महाभारत चल रही है? सभी धृतराष्ट्र और भीष्म पितामह बने हुए हैं? हम फैसला नहीं ले पा रहे। आखिर हम समाज में क्या उदाहरण देना चाहते हैं? क्या हम किसी बड़े अपराध का इंतजार कर रहे हैं?
- कई सीनेट सदस्यों ने कहा कि कोमल सिंह को एक साल के लिए विदाउट पे करके शराब छोड़ने के लिए इलाज कराने का मौका दिया जाए।
- प्रो. वीसी अरुण कुमार ग्रोवर ने कहा कि कोमल सिंह को सुधरने के कई मौके दिए। उसका विभाग बदलकर ओपन स्कूल में भेज दिया। इलाज कराने के लिए छुट्टी दी, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
- सीनेट सदस्य नीरू मलिक ने कहा कि मैं एक महिला हूं, मेरी एक बेटी है। मैं तो कभी ऐसे संस्थान में अपनी बेटी को नहीं पढ़ने भेजूंगी, जहां ऐसे लोग काम करते हैं।
- सीनेट सदस्य अख्तर महमूद और वीसी के बीच बहस हो गई। अख्तर ने जब इस केस से संबंधित फाइल को गारबेज बताया तो वीसी ने कहा कि यह गारबेज नहीं है।

जब वीसी को कहना पड़ा, ‘मेरी कोई सुनता नहीं’
सीनेट में कोमल सिंह के मामले पर जब जबरदस्त हंगामा होने लगा और दो धड़े आपस में भिड़ने लगे तो एक सीनेट सदस्य ने वीसी से कहा कि सदस्यों को समझाएं। इतनी लंबी-लंबी बहस कर रहे हैं। तब वीसी को कहना पड़ा कि ‘मेरी कोई सुनता नहीं है, क्या करें’।
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