केंद्र सरकार की ओर से गरीब सवर्ण विद्यार्थियों को शिक्षण संस्थानों में दिए 10 फीसदी आरक्षण के मद्देनजर पंजाब यूनिवर्सिटी प्रशासन ने खाका तैयार कर लिया है। इसके तहत पीयू से संबद्ध 196 कॉलेजों में 10 फीसदी सीटें ही बढ़ेंगी। पहले 25 फीसदी सीटें बढ़ाने का प्रस्ताव था, लेकिन पहले से ही कॉलेजों में 15 फीसदी आरक्षण का लाभ विद्यार्थियों को दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि कॉलेजों में लगभग 22 हजार सीटें बढ़ेंगी।
यूनिवर्सिटी नए शैक्षिक सत्र से पहले कॉलेजों को यह खाका भेजेगा और उसके बाद नियम लागू हो जाएंगे। आंकड़ों पर गौर करें तो पीयू से संबद्ध 196 कॉलेजों में लगभग 2.25 लाख सीटें हैं। इन सभी का एग्जाम भी पीयू हर साल कराता है। इसके अलावा पीयू में कैंपस सीटों की संख्या भी लगभग 16 हजार है। हर साल जरूरत के हिसाब से सीटें कॉलेजों में बढ़ती थीं लेकिन इस बार से केंद्र सरकार ने सवर्ण वर्ग के विद्यार्थियों के लिए 10 फीसदी आरक्षण लागू किया है।
सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए यूजीसी की ओर से विश्वविद्यालय को चिट्ठी जारी हुई है। उसके बाद पीयू प्रशासन ने सभी विभागों व कॉलेजों को चिट्ठी जारी की। सभी से पूछा है कि उनके यहां कितनी सीटें बढ़ाई जा सकती हैं। इसके मद्देनजर इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थिति भी जानी गई। लगभग सभी जगह से डाटा आ चुका है। अब पीयू प्रशासन उसे कंपाइल करके सीटों का गणित फिट कर रहा है। सूत्रों का कहना है कि 22 हजार सीटें बढ़ेंगी। पहले 25 फीसदी सीटें कॉलेजों में बढ़ाने का प्रस्ताव था, लेकिन पहले से ही वहां 15 फीसदी आरक्षण लागू है।
गेस्ट फैकल्टी रखी जाएगी
196 कॉलेजों में छात्रों की संख्या में वृद्धि होगी तो पढ़ाने के लिए शिक्षकों की भी जरूरत होगी। ऐसे में नई नियुक्तियां नहीं हो सकतीं। उन पर रोक लगी हुई है। इसके लिए गेस्ट फैकल्टी रखी जाएगी। एक साल के कांट्रेक्ट बेस पर शिक्षक रखे जाएंगे। सूत्रों का कहना है कि कॉलेजों को 400 से अधिक प्राइवेट शिक्षक रखने होंगे। इनका मानदेय कॉलेज मद से ही निकालना होगा। हालांकि यूजीसी यदि शिक्षकों की तैनाती को मंजूरी देगी तो राह आसान होगी। शिक्षकों की तैनाती होगी तो अध्यापन कार्य भी बेहतर हो पाएगा।