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बड़ी पहलः अब स्टेच्यू जीवंत करेंगे सिखों की बहादुरी और शौर्य की कहानी

Thu, 13 Jul 2017 02:32 PM IST
अखिल तलवार/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पर्यटन विभाग खास सेंटर
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सिखों की वीरता और शौर्य की दास्तां भावी पीढ़ी के लिए संजोने की कवायद चल रही है। इसके तहत पर्यटन विभाग खास सेंटर स्थापित करेगा। सिख इतिहास की तीनों सबसे अहम घटनाओं चमकौर साहिब के युद्ध, बड़ा घल्लूघारा और छोटा घल्लूघारा की दास्तानों को खास बुतों के जरिए जीवंत किया जाएगा ताकि आने वाली पीढ़ियों को गौरवशाली इतिहास से जोड़ा जा सके। चमकौर साहिब, संगरूर में बड़ा घल्लूघारा और काहनूवान में छोटा घल्लूघारा में अकाली-भाजपा सरकार ने यादगारें बनवाई थीं। कहीं पेंटिंग लगाई गई हैं तो कहीं डॉक्यूमेंट्री दिखाई जाती है।
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अब सरकार ने उन युद्धों में दिखाई वीरता की कहानी को और बेहतर ढंग से प्रस्तुत करने का फैसला किया है, जिसके लिए इन तीनों यादगारों में इंटरप्रिटेशन सेंटर बनाए जाएंगे, जिनमें मल्टीमीडिया कंटेंट और डिस्प्ले मैटीरियल केजरिए दास्तान प्रस्तुत की जाएगी। इसकेलिए डिस्प्ले हॉल बनाया जाएगा, कोर्ट एरिया होगा। इनमें खास तरह के स्टैचू लगाए जाएंगे, जो उन युद्धों की पल-पल की कहानी प्रस्तुत करेंगे। जिस कंपनी को यह काम दिया गया है, वही लैंडस्केपिंग भी करेगी।
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खास तरह के होंगे स्टैचू

पर्यटन विभाग खास सेंटर
तीनों यादगारों में जो स्टैचू लगाए जा रहे हैं, वे बेहद खास तरह के होंगे। इनके हाथ, पैर और मुंह सिलिकन का होगा। जबकि, बाकी बॉडी फाइबर ग्लास की होगी। हर स्टैचू के चेहरे पर अलग तरह के हाव-भाव होंगे। इनके शरीर पर जो बाल लगाए जाएंगे, वे भी असली होंगे। इतना ही नहीं, हाथ में हाथ के बाल, तो सिर में सिर के ही बाल लगाए जाएंगे। इन बुतों के हाथों में जो हथियार होंगे, वे भी असली होंगे। पर्यटन विभाग की कोशिश है कि ये बुत मैडम तुसाद म्यूजियम के बुतों की तरह नजर जाएं।

बेमिसाल है वीरता की दास्तान
चमकौर साहिब में 1704 में हुई ऐतिहासिक जंग सिखों की बेमिसाल वीरता की गवाह है, जिसमें श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के सिंहों ने मुगल फौज केदांत खट्टे कर दिए थे। उस पराक्रम की मुगलों ने कभी कल्पना भी नहीं की थी। वहीं, छोटा घल्लूघारा में भी सिखों ने शौर्य का परिचय दिया। 1746 में अपने भाई की मौत का बदला लेने को दीवान लखपत राय ने हजारों सैनिकों के साथ काहनूवान, गुरदासपुर में हमला कर दिया। ढाई महीने जंग चली, जिसमें 11 हजार सिख शहीद हुए। बड़ा घल्लूघारा भी सिख योद्धाओं की वीरता की मिसाल है। 1762 में अहमदशाह अब्दाली ने मालेरकोटला केपास गांव कुप रहीड़ा प
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