पंजाब सरकार ने मंगलवार को 47 हजार करोड़ रुपये के कर्ज का हिसाब राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित को दिया। हिसाब देने के 24 घंटे के भीतर 1500 करोड़ रुपये का कर्ज और पंजाब सरकार ने ले लिया है। हालांकि यह कर्ज आरबीआई के दिशानिर्देशो के अनुरूप है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) सभी राज्यों को कर्ज की सुविधा प्रदान करता है।
इस कर्ज के साथ पंजाब की मौजूदा सरकार अब तक कुल 48607 करोड़ रुपये का ऋण ले चुकी है। फिलहाल यह जानकारी नहीं दी गई है कि राज्य सरकार कर्ज की इस राशि का उपयोग किन-किन मदों में करने वाली है। आरबीआई की तरफ से गत 27 सितंबर को सभी राज्यों के लिए व्यक्तिगत निवेशक रिटेल डायरेक्ट पोर्टल के जरिये गैर-मुकाबले वाली स्कीम के तहत बोली लगाने वाली स्कीम में कर्ज की पेशकश की गई थी। पंजाब सरकार ने 1500 करोड़ रुपये के मियादी कर्ज के लिए बांड-पत्र की नीलामी कर यह रकम हासिल की।
गौरतलब है कि पंजाब राज्य पर वित्त वर्ष 2022-23 में 3.12 लाख करोड़ रुपये का कर्ज था। वहीं अगले वित्तीय वर्ष के अंत में 3.27 लाख करोड़ का आंकड़ा पार करने का अनुमान है। चालू वित्त वर्ष में सरकार ने कर्ज चुकाने पर बड़ी रकम खर्च की और मूलधन के रूप में 15,946 करोड़ और ब्याज के रूप में 20,100 करोड़ रुपये चुकाए हैं। वित्त वर्ष 2023-24 में सरकार को मूलधन के रूप में 16,626 करोड़ और ब्याज के रूप में 22,000 करोड़ रुपये का भुगतान करना होगा।
पंजाब आप के मुख्य प्रवक्ता मलविंदर सिंह कंग ने कहा कि कर्ज लेना एक नियमित प्रक्रिया है और सभी राज्य कर्ज उठाते हैं। पंजाब में भगवंत मान सरकार की यह उपलब्धि रही है कि सरकार ने अब तक 9 से 13 फीसदी ब्याज पर कर्ज लेने के बजाय 6-7 फीसदी ब्याज पर कर्ज लिया है। इससे सरकार पर बहुत अधिक बोझ नहीं पड़ता।