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17वीं लोकसभा में पंजाब की भूमिका होगी अहम, नेता विपक्ष के लिए मनीष तिवारी के नाम की चर्चा

Mon, 27 May 2019 10:47 AM IST
खुशबू गोयल नवनीत छिब्बर, अमर उजाला, मोहाली
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फाइल फोटो
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17वीं लोकसभा में पंजाब खासकर मोहाली की भूमिका अहम हो सकती है। नेता विपक्ष के लिए कांग्रेस में कई नामों पर चर्चा शुरू हुई है। इनमें श्री आनंदपुर साहिब के नवनिर्वाचित सांसद मनीष तिवारी का नाम भी शामिल है। तिवारी को नेता विपक्ष का प्रबल दावेदार माना जा रहा है। इसे मोदी लहर के बीच पंजाब में कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन का इनाम भी कहा जा सकता है।
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हालांकि इसके लिए शशि थरूर के नाम की भी चर्चा है। 52 सीटों के साथ विपक्ष में बैठने जा रही कांग्रेस संसद में अपने नेता की तलाश में है। यूं तो सोनिया गांधी और राहुल गांधी पहली पसंद हैं, लेकिन कांग्रेस थिंक टैंक ये मान कर चल रहा है कि गांधी परिवार नेता विपक्ष के पद को स्वीकार नहीं करेगा।

16वीं लोकसभा में भी गांधी परिवार ने खुद को संसद में नेता विपक्ष की भूमिका से दूर रखा था और कर्नाटक के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे को यह जिम्मेदारी दी थी। वहीं डिप्टी लीडर की जिम्मेदारी पंजाब के हिस्से आई थी। कैप्टन अमरिंदर सिंह को पार्टी ने संसद में डिप्टी लीडर बनाया था। इस बार खड़गे गुलबर्गा से चुनाव हार गए और कैप्टन अमरिंदर सिंह राज्य के मुख्यमंत्री हैं। ऐसे में पार्टी को नए चेहरे की तलाश है।
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सूत्रों के मुताबिक, पार्टी संसद में नेता विपक्ष की भूमिका में उस नेता को लाना चाहती है जो अच्छा वक्ता होने के साथ ही अंग्रेजी और हिंदी पर अच्छी पकड़ भी रखता हो। कांग्रेस के अधिकतर सांसद केरल और पंजाब से चुन कर गए हैं। इन दोनों राज्यों के नेता हिंदी के मामले में कमजोर माने जाते हैं। ऐसे में फिलहाल दो नामों को लेकर चर्चा जोरों पर है।

एक हैं शशि थरूर, जो तिरुवनंतपुरम से सांसद चुने गए हैं। दूसरा नाम है श्री आनंदपुर साहिब से चुने गए मनीष तिवारी का। दोनों ही नेताओं की हिंदी और अंग्रेजी पर अच्छी पकड़ है, साथ ही बेहतर वक्ता भी हैं। थरूर को लेकर पार्टी में संशय की स्थिति है। एक तो उनके पार्टी लाइन से हटकर बयान देने की आदत और दूसरा पत्नी सुनंदा पुष्कर आत्महत्या, ये दो ऐसी वजह हैं जिनके चलते शशि थरूर को पीछे छोड़ मनीष तिवारी इस रेस में आगे निकल गए हैं।

तिवारी 2009 के आम चुनाव में लुधियाना से सांसद चुने गए थे। साथ ही वह पार्टी प्रवक्ता के तौर पर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। राहुल गांधी के साथ भी उनके संबंध अच्छे माने जाते हैं। ऐसे में गांधी परिवार द्वारा नेता विपक्ष पद के लिए औपचारिक असहमति जताने पर मनीष तिवारी को यह जिम्मेदारी दी जा सकती है।
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