सामान्य वर्ग की श्रेणी के राज्यों में पंजाब ऐसा राज्य है जिस पर कर्ज का भार सबसे ज्यादा है। पंजाब पर राज्य की सकल घरेलू उत्पाद की 40.7 फीसदी रेशो के हिसाब से कर्ज बकाया है, जोकि महाराष्ट्र (17.9 फीसदी), कर्नाटक (18.2 फीसदी), गुजरात (20.2 फीसदी), तामिलनाडु (22.3 फीसदी), आंध्रप्रदेश (28.9 फीसदी), केरल (30.9 फीसदी) और पश्चिमी बंगाल (37.1 फीसदी) राज्यों की अपेक्षा काफी ज्यादा है।
राज्य द्वारा पिछले तीन सालों के दौरान कर्ज /सकल घरेलू उत्पाद की रेशो घटाने के लिए निरंतर प्रयास किए गए हैं। यह 2016-17 में 42.75 फीसदी था जो 2017-18 में 40.77 फीसदी रह गया और 2018-19 में घटकर 40.61 पर पहुंच गया और 2019-20 में घटकर 39.83 फीसदी रह गया। उम्मीद है कि राज्य की यह रेशो घटने की प्रवृत्ति जारी रहेगी और कर्ज /जीएसडीपी की मौजूदा रेशो दर घटकर साल 2020-21 में 38.53 फीसदी रह जाएगी। लेकिन कोविड-19 के कारण पैदा हुए हालातों ने इन प्रयासों को बड़ा झटका दिया है।