लुधियाना में पहले दिन खुले स्कूलों में कम रौनक देखने को मिली। गुरुवार को केवल सरकारी स्कूल ही खुले, प्राइवेट स्कूलों बंद रहे। सरकार के इस फैसले से कुछ परिजन खुश तो कुछ नाराज दिखे। उनका कहना है कि सरकार अपने फैसले को एक बार फिर से रिव्यू करे और दोबारा से फैसला ले। वह बच्चों की सेहत से किसी तरह का कोई खिलवाड़ न करे।
बच्चे सामाजिक दूरी का पालन नहीं कर पाएंगे। प्राइवेट स्कूलों की बात करें तो वहां सामान्य दिनों की तरह नौवीं से बारहवीं तक की कक्षाएं ही लगी। इन स्कूलों में पांचवीं से आठवीं कक्षा तक के बच्चों को नहीं बुलाया गया।
अमृतसर में सीबीएसई और आईसीएसई से मान्यता प्राप्त स्कूल रहे बंद
अमृतसर में पहले दिन विद्यार्थियों की संख्या नाममात्र रही। महज 40 प्रतिशत विद्यार्थी ही स्कूल पहुंचे। थर्मल स्क्रीनिंग के बाद विद्यार्थियों को कक्षा में बैठाया गया। हालांकि सीबीएसई तथा आईसीएसई से मान्यता प्राप्त स्कूल बंद रहे। संभावना है कि एक-दो दिन बाद इन स्कूलों को भी खोल दिया जाएगा।
आठवीं कक्षा की छात्रा अनुज व रोशनी ने बताया कि उन्हें बहुत खुशी हो रही है कि स्कूलों को दोबारा से खोल दिया गया। अब दोबारा से वे अपने दोस्तों से मिल सकेंगे। सरकारी स्कूल सहंसरा की सातवीं की छात्रा जश्नप्रीत ने बताया कि स्कूल खुलने के बाद अध्यापकों के सानिध्य में वह पढ़ाई अच्छे से कर पाएगी।
माल रोड सरकारी कन्या सीसे स्कूल की प्रिंसिपल मंदीप कौर ने बताया कि विद्यार्थियों की संख्या स्कूल में बढ़ गयी है। कोविड-19 से निपटने के लिए पर्याप्त प्रबंध किए गए हैं। डीईओ सेकेंडरी सतिंदरबीर सिंह ने दावा किया कि 60 प्रतिशत से अधिक बच्चे सरकारी स्कूलों में पहुंचे हैं। कोविड-19 के नियमों का ध्यान रखने के लिए स्कूल प्रबंधकों से कहा गया है।
प्रभाकर सीसे स्कूल के प्रिंसिपल राजेश प्रभाकर ने कहा कि सरकार के फैसले स्कूल प्रबंधकों को रास नहीं आ रहे हैं। सरकार को ठोस फैसला लेना चाहिए। स्कूलों को पूरी तरह से बंद कर दे या फिर अनिवार्य रूप से क्लास लगाने के लिए निर्देश दे। आधे बच्चे ऑनलाइन और आधे बच्चे क्लास में कैसे शिक्षा हासिल कर पाएंगे। कोविड-19 से निपटने के लिए स्कूल प्रबंधक सक्षम है। सरकार के फैसलों से अनुशासनहीनता पैदा हो रही है।