इस तरह से केवल मार्च के लिए ट्रैक्टर लेकर पहुंचे हरियाणा के किसान अलग ही दिखाई दिए। कुंडली से ट्रैक्टर लेकर जाने का सिलसिला जारी रहा और यह ट्रैक्टर मार्च 26 किमी दूर पिपली टोल के पास पहुंचा तो वहां टीकरी से मार्च निकालते हुए आ रहे किसान पहुंच गए। इस तरह वहां ट्रैक्टरों की करीब 26 किमी लंबी कतार कुंडली की ओर तो करीब 19 किमी लंबी लाइन टीकरी की ओर लगी थी। इस तरह वहां दोनों जगह के किसानों के मिलने से करीब 45 किमी लंबा ट्रैक्टर मार्च हो गया और इतना लंबा मार्च देखकर किसान नेता अपनी रणनीति को लेकर काफी संतुष्ट दिखाई दिए।
केएमपी पर दिनभर रहा किसानों का कब्जा, जाम लगा रहा
केएमपी पर गुरुवार को दिनभर किसानों का कब्जा रहा। क्योंकि किसानों ने केएमपी पर सुबह ही ट्रैक्टर खड़े करने शुरू कर दिए थे, जिससे केएमपी को बंद कर दिया गया था। उसके बाद किसानों ने ट्रैक्टर मार्च निकाला तो उससे जाम लग गया और ऐसे में वाहनों को नहीं निकलवाया जा सकता था। इसलिए वाहनों को केजीपी पर गोलचक्कर से पहले ही रोक दिया गया। जबकि केएमपी पर टिकरी से किसानों के ट्रैक्टर लेकर पहुंचने से पहले ही रोक दिया गया था। यह गुरुवार को शाम तक रहा और किसानों के पूरी तरह से केएमपी खाली करने के बाद ही यातायात सुचारू किया गया।
केएमपी पर मार्च के दौरान ट्रैक्टर से गिरकर किसान घायल
कृषि कानूनों के खिलाफ केएमपी पर ट्रैक्टर मार्च के दौरान एक किसान ट्रैक्टर से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। अन्य किसान गिरे हुए किसान को गाड़ी में लेकर पिपली टोल पर पहुंचे। जहां से उसे हाईवे की एंबुलेंस की मदद से सोनीपत अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। झज्जर के गांव डीघल निवासी किसान नरसी गुरुवार को अपने साथी किसानों के साथ ट्रैक्टर पर सवार होकर ट्रैक्टर मार्च में शामिल होने केएमपी पर आया था।
मार्च के दौरान वह ट्रैक्टर से गिर गया। उसके साथियों को नरसी के गिरने का पता भी नहीं चला। वे आगे निकल गए। पीछे से आ रहे अन्य किसानों ने जब नरसी को सड़क पर पड़ा देखा तो अपनी गाड़ी में लेकर पिपली टोल पर पहुंचे। जहां पर तैनात पुलिस ने हाईवे एंबुलेंस की मदद से सोनीपत अस्पताल पहुंचाया। नरसी को सिर व चेहरे पर गंभीर चोट आई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
किसानों का यह ट्रैक्टर मार्च 26 जनवरी की किसानों की परेड की एक रिहर्सल है। अगर सरकार अभी नहीं जागती है तो अबकी बार 26 जनवरी की परेड में देश का अन्नदाता इतनी बड़ी संख्या में शामिल होगा कि गणतंत्र दिवस की परेड एतिहासिक होगी। अब सरकार को मानिसक रूप से तैयार करने का ही काम किसान रहे हैं। किसान व सरकार के बीच जिस तरह से अविश्वास बन गया है, इसकी जिम्मेदार कोई नहीं, बल्कि देश की सभी राजनीतिक पार्टियां हैं। अभिमन्यु कोहाड़, अध्यक्ष, राष्ट्रीय किसान-मजदूर महासंघ।
किसानों ने ट्रैक्टर मार्च निकालकर सरकार को दिखा दिया है कि वह किस तरह से एकजुट है और वह कृषि कानून रद्द कराकर ही दम लेंगे। अब सरकार के पास कोई दूसरा रास्ता नहीं है और उसे कानून रद्द करने होंगे। अब सरकार जितनी भी देरी करेगी, उससे उसकी परेशानी ही बढ़ेगी। इसलिए सरकार को किसानों की मांग पूरी करनी चाहिए और आठ जनवरी की बातचीत में कोई फैसला लेना चाहिए। गुरनाम सिंह चढूनी, अध्यक्ष भाकियू हरियाणा।
यह ट्रैक्टर मार्च 26 जनवरी की परेड की रिहर्सल थी और यह रिहर्सल उम्मीद से ज्यादा अच्छी रही। जिस तरह से पंजाब, हरियाणा, यूपी समेत अन्य कई राज्यों के किसान इसमें शामिल हुए है, उससे सरकार को यह भी दिख गया होगा कि यह पूरे देश के किसान का आंदोलन है। अब सरकार को इस ट्रैक्टर मार्च को देखकर किसान की ताकत को समझना होगा और कृषि कानून रद्द करने का फैसला लेना चाहिए। हरेंद्र सिंह लखोवाल, सदस्य संयुक्त किसान मोर्चा।