हरजीत सिंह को 6 अक्तूबर 1993 को उसके गांव सहारन माजरा से पंजाब पुलिस के तत्कालीन एएसआई हरिंदर सिंह पुत्र गुरचरण सिंह निवासी गांव माछी जोआ जिला कपूरथला ने अगवा किया और यूपी पुलिस के एसपी रैंक के अधिकारी रविंदर कुमार सिंह पुत्र मोरध्वज निवासी गांव पपना जिला लखनऊ, इंस्पेक्टर बृजलाल वर्मा पुत्र बालादीन निवासी गांव सोहाजना, जिला महोबा और कांस्टेबल ओंकार सिंह पुत्र माधव सिंह निवासी गांव फतेहपुर जिला लखनऊ के साथ मिलकर 12 अक्तूबर 1993 को फर्जी एनकाउंटर दिखाकर मार दिया।
इसी आधार पर हरिंदर सिंह को प्रमोट कर एसआई बना दिया गया था। इस मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने 1996 में सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। सीबीआई कोर्ट ने हरजीत सिंह की हत्या में हरिंदर सिंह, बृजलाल वर्मा, रविंदर और ओंकार को दोषी पाया। इसके बाद 1 दिसंबर 2014 को चारों पुलिसकर्मियों को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।