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सौगात: मालेरकोटला में अल्पसंख्यक कोटे से बनेगा पंजाब का पहला मेडिकल कॉलेज

Thu, 09 Jul 2020 06:42 PM IST
ajay kumar संवाद न्यूज एजेंसी, संगरूर (पंजाब)

सार

  • सूबे के पांचवें मेडिकल कॉलेज के लिए 20 एकड़ जगह की तलाश 
  • डीसी सोमवार को चंडीगढ़ भेजेंगे रिपोर्ट, अल्पसंख्यक मंत्रालय ने दी मंजूरी
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media
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विस्तार
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लंबे इंतजार के बाद आखिरकार मालेरकोटला को अपना मेडिकल कॉलेज मिलने की मांग पूरी होने वाली है। डीसी रामवीर सिंह सोमवार को अपनी रिपोर्ट सरकार को पेश करेंगे, जिसमें जगह के चयन का उल्लेख होगा। मालेकोटला में बनने वाला राज्य का पांचवां मेडिकल कॉलेज अल्पसंख्यक कोटे से बनेगा। केंद्र के अल्पसंख्यक मंत्रालय ने मेडिकल कॉलेज स्थापित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। अब पंजाब सरकार जमीन तलाश करने के बाद कॉलेज बनाने का खाका तैयार करेगी। 

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बता दें कि पंजाब की कैबिनेट मंत्री रजिया सुल्ताना ने इस विषय में मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह को पत्र लिखा था। पत्र में उन्होंने कहा था कि अल्पसंख्यक कोटे से मालेरकोटला में मेडिकल कॉलेज बनता है तो इससे स्थानीय लोगों को काफी लाभ मिलेगा। मौजूदा समय में लोगों को पटियाला, लुधियाना और चंडीगढ़ जाना पड़ता है। पत्र भेजने के बाद रजिया सुल्ताना लगातार अल्पसंख्यक मंत्रालय के संपर्क में रही और आखिरकार उन्हें सफलता मिली और मालेरकोटला में मेडिकल कॉलेज का प्रस्ताव पास हो गया। 

डीसी रामवीर सिंह ने बताया कि मालेरकोटला में मेडिकल कॉलेज निर्माण के लिए सरकार को जमीन की तलाश है। सोमवार को वह क्षेत्र का दौरा करेंगे और जमीन चिन्हित प्रस्ताव सरकार को भेजेंगे। मेडिकल कॉलेज बनाने के लिए चार-पांच जगह देखी गई हैं। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज के लिए करीब 20 एकड़ जमीन की जरूरत है। 
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पंजाब का अकेला शहर, जहां बहुसंख्यक है मुस्लिम
साल 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार मालेरकोटला की कुल आबादी 1 लाख 35 हजार 424 है। इसमें 68.5 फीसदी मुसलमान, 20.71 फीसदी हिंदू, 9.50 फीसदी सिख और 1.29 फीसदी अन्य लोग हैं। यह पंजाब का इकलौता शहर है जहां मुस्लिम बहुसंख्यक हैं। इतिहास की बात करें तो मलहेर इलाके (अब मलेर) की नींव सदर-उ-द्दीन ने 1466 में रखी थी। 

वह अफगान मूल के थे और यहां आकर बस गए थे। बहलोल लोधी दिल्ली जाते समय सदर-उ-द्दीन के पास रुके थे और बाद में अपनी बेटी की शादी उनसे कर दी और साथ में 68 गांव भी दिए। यही इलाका मलेर कहलाया। बहलोल लोधी ने ही लोधी वंश की नींव रखी थी। उन्हें लोग बाबा हैदर शेख भी कहते हैं और यहां हर मजहब के लोग इबादत के लिए आते हैं।

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