केंद्र सरकार ने कृषि मंडीकरण के बारे में राष्ट्रीय नीति का ड्राफ्ट पंजाब सरकार को भेजा था, ताकि इसे प्रदेश में लागू करने के लिए आगे की प्रक्रिया शुरू की जा सके। इस नीति का चौतरफा विरोध चल रहा है। किसान, आढ़ती व शेलरों तक ने इस पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराई हैं।
अब पंजाब सरकार ने भी इस नीति को लेकर केंद्र सरकार को अपना जवाब भेज दिया है। वीरवार को सरकार ने अपना जवाब भेजकर कहा कि साइलो, वेयरहाउस और कोल्ड स्टोरेज को मंडी यार्ड व मार्केट बनाना मंजूर नहीं है। प्रदेश में 1900 मंडियों के साथ पंजाब का मौजूदा मंडी सिस्टम काफी बेहतर है, जिसके चलते निजी मंडियों की जरूरत नहीं है। अतिरिक्त मुख्य सचिव कृषि एवं किसान कल्याण अनुराग वर्मा की तरफ से केंद्र सरकार को अपना जवाब भेजा गया है, जिसमें कई प्रमुख बिंदुओं पर सरकार ने अपना एतराज जताया है।
कृषि विभाग ने एतराज जताया है कि निजी मंडियां आने से प्रदेश के पुराने मंडी सिस्टम पर प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि किसानों व आढ़तियों के बीच गहरा नाता है। प्रदेश में कुल 28 हजार से अधिक आढ़ती काम कर रहे हैं और इससे उनका भविष्य भी दांव पर लग जाएगा।
इसी तरह नई नीति में ट्रेड के लिए नेशनल लाइसेंस देने की बात भी कही गई है, जिसके तहत लाइसेंसी कृषि क्षेत्र में पूरे देश भर में कहीं भी व्यापार कर सकता है। इस प्रावधान पर भी राज्य सरकार ने एतराज जताया है, जिसमें कहा गया है कि अगर व्यापार के दौरान पेमेंट या किसी अन्य वजह से कोई विवाद होता है तो उसके निपटारे के लिए जिम्मेदारी तय नहीं की गई है। राज्य सरकार इसमें किस तरह की कार्रवाई कर सकती है, उसका उल्लेख नहीं है।
राज्य के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने इसे लेकर सभी हितधारकों किसान यूनियनों, आढ़तियों व शेलरों के साथ भी बैठक की थी और उनकी सभी आपत्तियों को भी सरकार ने अपने जवाब के साथ भेज दिया है।
इसी तरह ड्राफ्ट में निर्यातकों, संगठित खुदरा विक्रेताओं को थोक खरीदारों को सीधे किसानों के खेत से खरीद की अनुमति दी गई है, जिसके चलते किसान यूनियनों की तरफ से कहा जा रहा है कि यह ड्राफ्ट तीन कृषि कानूनों से भी खतरनाक है।
नीति के अनुसार, साइलो को मंडी यार्ड बनाने से यह लाभ होंगे
ड्राफ्ट में सिफारिश की गई कि साइलो को मंडी यार्ड बनाने से किसानों का लाभ बढ़ेगा। इससे जमीनी स्तर पर मार्केट इको सिस्टम विकसित होगा, जिसमें राष्ट्रीय आयोग की रिपोर्ट, 2006 में सिफारिश की तुलना से भी बाजार तक पहुंच बेहतर होगी और किसानों के बीच अतिरिक्त उत्पादन को गोदामों में जमा करने की आदत डाली जाएगी, जिससे अतिरिक्त लाभ मिलेगा। देश में प्रतिस्पर्धी ऑनलाइन मार्केटिंग के लिए एक लैंडस्केप विकसित करने करने में भी यह सुधार मदद करेगा।
कृषि मंडीकरण नीति के ड्राफ्ट में सभी ऐसे प्रावधान हैं, जो पंजाब के मौजूदा मंडी सिस्टम के लिए खतरा है। इसी के चलते हमने सरकार से इसे किसी भी कीमत पर लागू न करने की सिफारिश की थी। - अमनदीप सिंह, प्रधान, फेडरेशन ऑफ आढ़ती एसोसिएशन