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अच्छी खबर : छठे वेतन आयोग की रिपोर्ट तैयार, जगी नए वेतनमान मिलने की आस, यहां फंस सकता है पेंच

Fri, 11 Dec 2020 10:25 AM IST
निवेदिता शर्मा अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब में छठे वेतन आयोग की रिपोर्ट तैयार हुई। - फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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पांच साल के इंतजार के बाद पंजाब के सरकारी मुलाजिमों की वेतन संबंधी मांग पूरी होने की आस जगी है। पूर्व मुख्य सचिव जयसिंह गिल के नेतृत्व में गठित छठे वेतन आयोग ने अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप दे दिया है। जानकारी के अनुसार, जल्द ही इस रिपोर्ट को मुख्यमंत्री को सौंप दिया जाएगा।  

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फरवरी 2016 में गठित इस आयोग की सिफारिशें लागू करने की मांग लंबे समय से की जा रही थी। पहले अकाली-भाजपा सरकार और अब कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार द्वारा इस आयोग के कार्यकाल में प्रत्येक छह महीने पर बढ़ोतरी की जाती रही। आयोग के कार्यकाल में आखिरी बढ़ोतरी 30 जून 2020 को गई और आयोग का कार्यकाल 31 दिसंबर, 2020 तक बढ़ा दिया गया था। 


अब जयसिंह गिल ने राज्य सरकार को यह सूचना दे दी है कि छठे वेतन आयोग की रिपोर्ट तैयार कर ली गई है। इसके साथ ही उन्होंने रिपोर्ट सौंपने के लिए मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांगा है। अब मुलाजिम संगठनों को आस है कि राज्य सरकार जीएसटी का बकाया मिलने पर वेतन आयोग की सिफारिशें लागू कर देगी। वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल भी मुलाजिमों को भरोसा दिला चुके हैं कि केंद्र की तरफ बकाया जीएसटी का भुगतान होते ही सरकार नए वेतनमान लागू कर देगी। हालांकि प्रशासनिक प्रक्रिया के अनुसार, राज्य सरकार वेतन आयोग की रिपोर्ट मिलने के बाद उस पर मंथन के लिए अधिकारियों की एक कमेटी का गठन करेगी, जिसकी रिपोर्ट के बाद ही अंतिम फैसला होगा।
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पांच साल बीत गए आयोग की सिफारिशों की बाट जोहते
पंजाब में अकाली-भाजपा गठबंधन सरकार के समय फरवरी, 2016 में वेतन आयोग का गठन किया गया था। तब सरकार ने पूर्व मुख्य सचिव आरएस मान के नेतृत्व में आयोग का तीन सदस्यीय पैनल बनाया लेकिन इसके दो सदस्यों की नियुक्ति में ही नौ माह का समय बीत गया और दोनों सदस्यों की नियुक्ति नवंबर, 2016 में हो सकी। इसके बाद आयोग अपना कामकाज शुरू कर पाता, उससे पहले ही लेकिन राज्य में सरकार बदल गई। 

कैप्टन अमरिंदर सिंह के नेतृत्व में नई सरकार के सत्ता संभालने के कुछ समय बाद आरएस मान ने व्यक्तिगत कारणों से आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद कैप्टन सरकार ने पूर्व मुख्य सचिव जयसिंह गिल को आयोग की कमान सौंपी। वेतनमान संशोधन रिपोर्ट के लिए आयोग का कार्यकाल लगातार बढ़ाया जाता रहा। आयोग के समक्ष अब तक वेतनमान, भत्ते, वेतन-विसंगतियों और अन्य मुद्दों को लेकर राज्य सरकार के कर्मचारियों के विभिन्न संघ और अन्य समूहों की ओर से 600 से अधिक रिप्रेजेंटेशन दी जा चुकी हैं। 

कछुआ चाल से चला आयोग का काम
आयोग के गठन और इसके कामकाज को लेकर कर्मचारी संगठन शुरू से ही आवाज उठाते रहे हैं। दरअसल, आयोग का गठन करने और उसके अध्यक्ष के बदलने के बाद भी राज्य सरकार ने आयोग को कोई कार्यालय स्टाफ नहीं दिया। बस, चेयरमैन और सदस्य के रूप में ही यह आयोग चलता रहा। जनवरी, 2019 में आयोग ने सभी विभागों से कर्मचारियों संबंधी डाटा तलब किया था, लेकिन यह डाटा कंपाइल करने के लिए आयोग के पास स्टाफ ही नहीं है।

प्रदेश के 3.5 लाख कर्मचारियों का डाटा कब कंपाइल होगा, इसके बारे में कोई भी दावे से कुछ कहने को तैयार नहीं है। इसे देखते हुए सरकार ने 31 दिसंबर, 2019 तक आयोग का कार्यकाल बढ़ाया था। जुलाई, 2019 में राज्य सरकार ने 15वें वित्त आयोग सेल को ही छठे पंजाब वेतन आयोग के सेल के रूप में स्थापित करने का फैसला लिया। इसका उद्देश्य छठे पंजाब वेतन आयोग को आवश्यक सूचना/डाटा मुहैया कराना था, जिस पर वित्त आयोग सेल में कार्यरत अधिकारी और कर्मचारियों को ही काम का जिम्मा सौपा गया था। यह फैसला वित्त मंत्री की मंजूरी के बाद लिया गया था।

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