डीजीपी गुप्ता ने बताया कि उनके पास से 27,62,137 नशीली गोलियां, कैप्सूल, टीके और सिरप की बोतलें बरामद की गई थीं। इसके अलावा 70,03,800 रुपये ड्रग मनी बरामद की गई। बरनाला पुलिस ने मार्च, 2020 में इसी तरह मथुरा गैंग का पर्दाफाश किया था और 44 लाख के नशीले पदार्थ और 1.5 करोड़ रुपये ड्रग मनी जब्त की थी।
मई में निक्का की गिरफ्तारी से खुली गिरोह की परतें
मई महीने में बलविंदर सिंह उर्फ निक्का और चार अन्यों की 2,85,000 नशीली गोलियों (टैब कलोवीडोल) समेत गिरफ्तारी के साथ इस मुकदमे से पर्दा उठना शुरू हुआ था, जिसके विरुद्ध एफआईआर पुलिस थाना महल कलां में दर्ज है। इसके बाद जुल्फिकार अली को 12,000 नशीली गोलियों के साथ (टैब कलोवीडोल) गिरफ्तार किया गया। जुल्फिकार से पूछताछ के बाद हरीश की भूमिका का खुलासा हुआ, जो पंजाब में मेडिकल नशे की आमद और सप्लाई के मास्टरमाइंड में से एक है।
इन गिरफ्तारियों के बाद बरनाला पुलिस ने जांच और निगरानी योजनाएं तैयार करने में दो महीने बिताए और फिर एक जाल बिछाया। इसके बाद एक विशेष टीम पश्चिमी बंगाल भेजी गई, जहां से हरीश को पकड़ा गया। हरीश ने इस गिरोह की साजिशें रचने के तरीके और पंजाब समेत देश के 11 से अधिक राज्यों में सायकोट्रॉपिक ड्रग्ग की सप्लाई चेन संबंधी खुलासा किया। इसके बाद उत्तर प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब में छापे मारे गए, जिससे बड़ी संख्या में फार्मास्युटिकल नशीले पदार्थ, ड्रग मनी और वाहन जब्त किए गए।
डीजीपी ने कहा कि अब तक गिरोह के काम करने के तरीके के संबंध में पता लगा है कि हरीश मेडिकल प्रतिनिधि के तौर पर इंटरनेट और सोशल मीडिया द्वारा पता व फोन नंबर जैसी जानकारी का प्रयोग कर केमिस्टों और फार्मासिस्टों के साथ संपर्क करता था। इन तस्करों ने पहले से ही दिल्ली, आगरा, अमृतसर, जयपुर, ग्वालियर और भोपाल जैसे प्रमुख शहरों में चल रहे कोरियर/ट्रांसपोर्ट/माल ढुलाई जैसे नेटवर्क का प्रयोग किया और नकली बिलों की मदद से स्थानीय ट्रांसपोर्टरों का प्रयोग करते हुए कई राज्यों के विभिन्न स्थानों पर खेपें भेजी। हवाला चैनलों का प्रयोग करके पैसों की अदायगी और लेन-देन किया गया, जिसके लिए विशेष बैंक खाते इस्तेमाल किए गए।
मौत का कारण बन सकती हैं जब्त की दवाएं
जब्त किए गए नशीले पदार्थ ज्यादातर फार्मास्युटिकल ओपीओड हैं। इनमें से बहुत से फार्मास्युटिकल उत्पादों का न केवल जायज और महत्वपूर्ण डाक्टरी प्रयोग होता है बल्कि ये उत्पाद रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर की उचित मेडिकल सलाह से बिना बेचे नहीं जा सकते। गिरोह इन नशों का गलत ढंग से प्रयोग कर रहा था। इन दवाओं का जरूरत से अधिक प्रयोग करने से यह मौत का कारण भी बन सकता है।