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पंजाब: कांग्रेस की मुश्किल बने सिद्धू और कैप्टन, संयुक्त बैठक में सीएम चन्नी ने किया मंथन

Fri, 22 Oct 2021 10:51 PM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़

सार

मुख्यमंत्री चन्नी ने शुक्रवार को अपने मंत्रियों और वरिष्ठ विधायकों के साथ एक बैठक की, जो लगभग पांच घंटे तक चली। इसे उप मुख्यमंत्री रंधावा व कैप्टन के बीच हुई ताजा तकरार से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
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पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एक तरफ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू अपनी ही सरकार पर ताबड़तोड़ हमले कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और मौजूदा मंत्रियों के बीच छिड़ी जंग ने मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को बुरी तरह आहत किया है।

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शुक्रवार को इन हालात पर चर्चा के लिए उन्होंने अपने मंत्रियों और सीनियर विधायकों के साथ एक बैठक की, जिसमें उन्होंने हालात पर नाराजगी जताई। इसे उप मुख्यमंत्री रंधावा व कैप्टन के बीच हुई ताजा तकरार से भी जोड़कर देखा जा रहा है। करीब पांच घंटे चली इस बैठक में नवजोत सिद्धू के अलावा कैप्टन द्वारा नई पार्टी बनाने के एलान संबंधी मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया गया।

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इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने राज्य में पार्टी और सरकार के मौजूदा हालात के बारे में हाईकमान को रिपोर्ट देने के लिए उप मुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री भारत भूषण आशु को देर शाम अपने चॉपर से दिल्ली भेजा। माना जा रहा है कि शनिवार को सुबह वे पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल से मिलेंगे। यह भी चर्चा है कि कैप्टन और रंधावा के बीच छिड़ी जंग से हाईकमान सकते में है और ऐसे किसी नए विवाद को उभरने नहीं देना चाहता, इसलिए दोनों नेताओं को दिल्ली बुलाया गया है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार चन्नी सरकार और पंजाब कांग्रेस के नेता कैप्टन द्वारा नई पार्टी बनाने के ऐलान से चिंतित हैं और वे हाईकमान से कैप्टन को पार्टी के निष्कासित करने की मांग भी कर सकते हैं। साथ ही शुक्रवार की बैठक में अधिकांश मंत्रियों ने सिद्धू के तौर-तरीकों पर लगाम लगाने पर जोर दिया है। इनका कहना था कि सिद्धू की सार्वजनिक तौर पर बयानबाजी कांग्रेस सरकार की मुश्किलें बढ़ा रही हैं।

ऐसे में जानकारी मिली है कि हाईकमान से मिलने गए दोनों मंत्री पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से मिलकर उन्हें सिद्धू की बयानबाजी का लेखा-जोखा सौंपेंगे। पार्टी का मानना है कि कैप्टन से उलझने के बजाय फिलहाल उनके अगले कदम पर नजर रखी जाए, ताकि चुनावी रणनीति बनाते समय कांग्रेसियों में निजी झगड़े जैसे किसी आरोप से पार्टी की छवि को ठेस न पहुंचे।
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