सरकार में बैठे हुए नेता और अधिकारियों को उनको यह तक नहीं पता कि आढ़ती व किसान का चोली दामन का साथ है। दोनों एक दूसरे के सुख दुख के साथी हैं और किसान तो आढ़ती को अपना एटीएम मानते हैं। किसानों की बागडोर अगर व्यापारियों के हाथ गई तो किसानों की हालत खराब हो जाएगी। आढ़ती का सुख-दुख का साथ टूट जाएगा और व्यापारी तो किसानों का हमदर्द नहीं बन सकता।
गांव अैदलपुर के किसान तजिंदर सिंह लंबड़ का कहना है कि सरकार व अधिकारियों को क्या पता कि आढ़ती व किसान का रिश्ता कितना पुराना है? मेरे दादा परदादा का जिस आढ़ती के साथ रिश्ता था, आज भी बरकार है और मेरे बच्चे भी उसी आढ़त के साथ आगे काम करेंगे। हमारा कितना साथ आढ़ती ने दिया है, उसको अल्फाजों में नहीं बताया जा सकता।
कोरोना संकट में भी आढ़तियों ने की मदद
किसान बलवंत सिंह मल्सियां का कहना है कि आढ़ती किसान का एटीएम होते हैं, आधी रात को भी जरूरत पड़ने पर पैसा भिजवा देते हैं। व्यापारी क्या ऐसा कर पाएंगे? कारपोरेट सेक्टर में रिश्तों की कदर नहीं होती। किसान आढ़ती से अग्रिम पैसे लेकर खेती करता है।
आढ़ती को किसान का एटीएम बताते हुए कहा कि आढ़ती किसान के हर दुख-सुख में तैयार रहते हैं। आधी रात को भी किसान को पैसे की जरूरत होती है तो आढ़ती उन्हें पैसे देकर समस्या का समाधान करता है। सैदपुर के रहने वाले किसान सुखविंदर सिंह लड्डू का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान किसानों की आढ़तियों ने काफी मदद की है, इसे कैसे भुलाया जा सकता है।
आढ़तियों पर रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा
किसान ट्रेडर्ज नाम से आढ़त चलाने वाले जतिंदर कुमार लक्की का कहना है कि सरकार आढ़तियों व उनके स्टाफ को बेरोजगार करने पर तुली हुई है। आढ़तियों का काफी पैसा किसानों की तरफ लगा हुआ है, सरकार को किसानों के दुख सुख में शरीक नहीं होती, आढ़ती ही किसानों के हमदर्द हैं।
आढ़त कंपनी गुरचरण सिंह-अमरीक सिंह के मालिक परमजीत सिंह का कहना है कि मंडियां ठप हो जाएंगी और आढ़तियों पर रोजगार का संकट खड़ा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि किसान और आढ़ती के प्रति सरकार का रवैया नकारात्मक रहा है। सरकार आढ़ती और किसान का रिश्ता तोड़ने का प्रयास कर रही है। तीन अध्यादेशों का पूरा देश विरोध कर रहा और आढ़ती किसानों के साथ हैं।