मुख्यमंत्री ने नीट की परीक्षाओं से जुड़े सवाल पर कहा कि इस समय जरूरी क्या है, लोगों की जान बचाना या परीक्षा कराना। वे परीक्षा कराने के खिलाफ नहीं हैं लेकिन यह परीक्षाएं नवंबर-दिसंबर में भी कराई जा सकती हैं, जब कोविड का असर काफी हद तक नियंत्रण में आ चुका होगा। इसके साथ ही उन्होंने पंजाब में इस महामारी के डरावने आंकड़ों का खुलासा किया। उन्होंने कहा कि वे इन डरावने अनुमानों को लेकर चिंतित हैं कि अपने राज्य के लोगों को कैसे बचाएं।
केंद्र से नहीं मिल रही मदद
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार कोविड-19 के हालात से निपटने के लिए हरसंभव कदम उठा रही है लेकिन सब कुछ उसे अपने दम पर ही करना पड़ रहा है। केंद्र सरकार से जिस मदद की उम्मीद ऐसे मौके पर की जा सकती थी, उसके मुकाबले राज्य को कोई मदद नहीं मिली है। उनकी सरकार अपने योग्य अधिकारियों, कर्मचारियों और सूबे के आम लोगों को साथ लेकर यह लड़ाई लड़ रही है। उन्हें उम्मीद है कि यह एकजुटता कोरोना पर फतेह दिलाएगी। कैप्टन ने पंजाब के लोगों से आह्वान किया कि वे कोविड के मद्देनजर लागू की गईं बंदिशों का सख्ती से पालन करें ताकि मुश्किल हालात पर समय रहते काबू पा लिया जाए।
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