राज्य के मुख्य सचिव अनुराग वर्मा ने जांच रिपोर्ट के आधार पर पहले तो जमीन ट्रांसफर के फैसले पर स्टे लगाया और उसके बाद एफआईआर दर्ज करने के लिए ग्रामीण विकास विभाग को आदेश दिया। इसके साथ ही रिटायर्ड एडीसी के सभी प्रकार के बेनिफिट पर भी रोक लगा दी गई है। जांच आदेश के बाद भी प्रशासन की तरफ से अभी तक मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।
इनके नाम कर दी गई जमीन
जानकारी के मुताबिक 91.75 एकड़ जमीन होशियारपुर की बीना परमार, फिरोजपुर की इंदरदीप कौर, जेल रोड गुरदासपुर निवासी तरसेम रानी, तारागढ़ निवासी बलविंदर कौर, तारागढ़ निवासी मंजीत कौर और कलानौर गुरदासपुर निवासी परबीन कुमारी ने ली थी। गोल पंचायत और 6 प्राइवेट पार्टियों के बीच धारा 11 के अधीन केस एडीसी कोर्ट में लगा, जिसे डीडीपीओ कुलदीप सिंह ने एडीसी का एडिशनल चार्ज मिलते ही 27 फरवरी को प्राइवेट पार्टियों के पक्ष में फैसला दे दिया, जबकि उन्हें 28 फरवरी को रिटायर होना था।
खनन माफिया की पसंदीदा है जमीन
गोल गांव की उक्त जमीन पहले से ही खनन माफिया की पसंदीदा रही है। एडीसी कुलदीप सिंह द्वारा छह निजी पार्टियों के पक्ष में जमीन ट्रांसफर किए जाने के तुरंत बाद क्रैशर संचालकों में इस जमीन को खरीदने की होड़ लग गई थी। गोल और भट्टियां की जमीन पर अवैध खनन सालों पहले से किया जा रहा है।
कांग्रेस सरकार में भी कुछ राजनीतिक लोग ये जमीन खरीदना चाहते थे। गोल पंचायत के सरपंच सुनील कुमार ने 2 अप्रैल 2021 को एसएचओ तारागढ़ और डीडीपीओ पठानकोट को शिकायत दी कि भट्टियां की जमीन पर अवैध खनन हो रहा है। इस पर डीडीपीओ पठानकोट के एसएसपी को लिखे पत्र पर अज्ञात लोगों के खिलाफ अवैध खनन का पर्चा 7 अप्रैल 2021 को दर्ज किया गया लेकिन इसके 2 दिन बाद ही 9 अप्रैल को गांव के सरपंच सुनील कुमार के खिलाफ ही अवैध खनन का पर्चा दर्ज करा दिया गया।