वीसी डॉ. राज बहादुर से दुर्व्यवहार का मामला।
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बाबा फरीद मेडिकल यूनिवर्सिटी के वीसी डॉ. राज बहादुर से दुर्व्यवहार के मामले में स्वास्थ्य मंत्री चेतन सिंह जौड़ामाजरा अधिकारियों की सुनियोजित चाल में फंस गए। यूनिवर्सिटी में मनमाफिक पोस्टिंग वीसी द्वारा नहीं किए जाने से अधिकारी नाराज चल रहे थे। वे वीसी से इसका बदला लेना चाहते थे।
यह खुलासा अस्पताल प्रबंधन के ही कुछ अधिकारियों ने गुपचुप तरीके से हुई सरकारी जांच में किया है। जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आए हैं कि स्वास्थ्य मंत्री को अधिकारी जानबूझकर अस्पताल के उसी कमरे में ले गए जो विशेष रूप से कैदियों के लिए बनाया गया था। कैदी नहीं होने के कारण उस बंद पड़े कमरे में कुछ बेड पर फटे हुए गद्दे पड़े थे। हालांकि स्वास्थ्य मंत्री द्वारा वीसी को बेड पर लेटने के लिए कहे जाने का मामला सुनियोजित नहीं था।
वीसी डॉ. राज बहादुर का कहना है कि पहले अस्पताल में कैदियों को अलग-अलग वार्ड में रखा जाता था, जब यह मुद्दा जेल विभाग द्वारा उठाया गया तो अस्पताल में दो महीने पहले ही कैदियों के लिए दो कमरे बनाए गए। इन दोनों कमरों में 12 बेड लगे हुए हैं। अस्पताल में इनदिनों तीन कैदी ही भर्ती हैं इसलिए दूसरा कमरा बंद किया हुआ है। स्वास्थ्य मंत्री जब चेकिंग पर आए तो उन्होंने अधिकारियों के फीडबैक पर बंद कमरे को ही खोलने के लिए कहा। यह भी सामने आया है कि दौरे के दौरान मंत्री के साथ कुछ अधिकारी ऐसे थे जो वीसी से नाराज चल रहे थे।
सरकार ने अभी स्वीकार नहीं किया वीसी का इस्तीफा
पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री के दुर्व्यवहार से आहत होकर वीसी डॉ. राज बहादुर ने इस्तीफा दे दिया था लेकिन पंजाब सरकार ने अभी उनके इस्तीफे को स्वीकार नहीं किया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उनसे बात कर घटना पर खेद जताते हुए इस्तीफा वापस लेने का आग्रह किया है।