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पंजाब-हरियाणा में पराली जलाने का असर चंडीगढ़ पर पड़ा, देखिए कितना प्रदूषण बढ़ा?

Tue, 31 Oct 2017 09:12 AM IST
योगेंद्र त्रिपाठी/अमर उजाला, चंडीगढ़
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पराली जलाने के बाद उड़ता धुआं - फोटो : File Photo
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चंडीगढ़ से लगती पंजाब और हरियाणा की सीमा में जलाई गई पराली से चंडीगढ़ में प्रदूषण का स्तर बढ़ गया है। शहर का आरएसपीएम 56 माइक्रो क्यूबिक प्रति मीटर तक बढ़ गया है। यह प्रदूषण पराली जलाने के कारण बढ़ा है।  पहले चंडीगढ़ का आरएसपीएम तय मानक से भी कम था लेकिन अब यह तेजी से बढ़ गया है।
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चंडीगढ़ पर्यावरण निदेशक संतोष कुमार ने बताया कि चंडीगढ़ में पंजाब एवं हरियाणा से लगती सीमाओं में पराली को जलाया गया है। इसी कारण यहां भी आरएसपीएम सभी क्षेत्रों का बढ़ गया। इसके अलावा मौसम का असर भी है। क्योंकि ठंड में सभी धूल कण नहीं उड़ पाते हैं और हवा में जम जाते हैं, इससे प्रदूषण का स्तर बढ़ता है। चंडीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से शहर में सभी जगह बोर्ड लगाए गए हैं। डिस्प्ले में यह पता चल रहा है कि शहर का प्रदूषण स्तर 33 से बढ़कर 50 माइक्रो क्यूबिक तक बढ़ गया है। इस तरह के हालात में शहर प्रदूषण मुक्त नहीं रह पाता है। 

सेक्टर-17 का आरएसपीएम 137 तक पहुंचा
शहर के सेक्टर - 17 में 10 दिन पहले आरएसपीएम 81 था जो अब बढ़कर 137 हो गया है। वहीं इमटेक का प्रदूषण स्तर 116 था, जो अब बढ़कर 147 के पास हो गया है। प्रदूषण का यह स्तर शहर के हर हिस्से में बना हुआ है। इसमें आरएसपीएम नार्मल 100 माइक्रो क्यूबिक मीटर क्यूब होता है लेकिन यह सभी जगह बढ़ गया है। वहीं वर्किंग डे में अभी तक 70 डेसीबल तक ध्वनि प्रदूषण पहुंच गया है। यह भी मानक से अधिक हो गया है।  गौर हो कि पराली जलाने पर सेटेलाइट से नजर रखे जाने के बाद भी प्रदूषण को राहत नहीं मिली है। 
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इस तरह बढ़ा है दस दिन में प्रदूषण

parali
स्थान -----------दस दिन पहले --------- अब
 सेक्टर - 17 ------------81----------------137
 इमटेक ---------------116---------------147
 कैंबवाला -------------69----------------131
 सेक्टर - 29 -----------87--------------138
 नोट --  यह बढ़ा है चंडीगढ़ का आरएसपीएम । यह आंकड़ा चंडीगढ़ प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकडे़ पर आधारित हैं।

 पराली जलाने और मौसम में बदलाव के कारण शहर को प्रदूषण स्तर बढ़ा है। एक हफ्ते में यह सामान्य हो जाएगा। पंजाब एवं हरियाणा राज्य में पराली जलाने का असर चंडीगढ़ में अधिक हो गया है। 
 संतोष कुमार , निदेशक , चंडीगढ़ पर्यावरण विभाग 
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