हरियाणा और पंजाब में नौकरियों के दौरान पिछड़े वर्ग के लोगों को आरक्षण का पूरा लाभ नहीं मिल रहा है। देश में बैकवर्ड क्लास के लिए जो कोटा निर्धारित है, दोनों राज्य उस कोटे के तहत पिछड़ों को नौकरियां नहीं दे रहे हैं। इस बात से राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग काफी खफा है।
आयोग ने पिछड़े वर्ग के लोगों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर हरियाणा और पंजाब के अफसरों से पंद्रह दिन में आयेाग के समक्ष पेश होकर जवाब तलब किया है। देश के सभी राज्यों में पिछड़ों की स्थिति, उन्हें मिलने वाले हकों व सुविधाओं की समीक्षा करने के लिए राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग सभी राज्यों में अफसरों के साथ बैठकें कर रहा है।
इसी कड़ी में आयोग के चेयरमैन डा. भगवान लाल सहनी, उपाध्यक्ष लोकेश प्रजापति, सदस्य सुधा यादव, सदस्य कोसलेंद्र पटेल समेत आयेाग के अफसरों ने दो दिन चंडीगढ़ प्रवास के दौरान हरियाणा और पंजाब के अफसरों के साथ बैठकें की। इस बैठक के दौरान आयोग के चेयरमैन व सदस्य दोनों राज्यों में पिछड़ों की वर्तमान स्थिति से पूरी तरह संतुष्ट नहीं दिखे। जिसके चलते उन्होंने कई बिंदुओं पर दोनों राज्यों के अफसरों से पंद्रह दिन में जवाब मांगा है।
नौकरियों में पिछड़ों के कम कोटे से आयोग खफा
देश में नौकरियों व शैक्षणिक संस्थानों में विभिन्न कैटेगरी के अंतर्गत पिछड़ों को 27 प्रतिशत आरक्षण का लाभ तय है। हरियाणा में कैटेगरी बैकवर्ड क्लास (ए) के अंतर्गत क्लास वन और टू की सीधी भर्तियों में सिर्फ 11 प्रतिशत कोटा दिया जा रहा है। जबकि तृतीय व चतुर्थ श्रेणी भर्तियों में 16 प्रतिशत कोटा दिया जा रहा है।
इसी तरह कैटेगरी बैकवर्ड क्लास (बी) क्लास वन और टू की भर्तियों में सिर्फ 6 प्रतिशत और तृतीय और चतुर्थ श्रेणी में 11 प्रतिशत कोटा दिया जा रहा है। जबकि कैटेगरी बैकवर्ड क्लास (सी) में क्लास वन और टू की भर्तियों में भी केवल 6 प्रतिशत और तृतीय व चर्तुथ श्रेणी में 10 प्रतिशत कोटे का लाभ मिल रहा है।
मगर हाईकोर्ट के आदेशानुसार बैकवर्ड क्लास (सी) कैटेगरी में पिछड़ों को कोटे के लाभ पर 26 मई 2016 से फिलहाल स्टे लगा हुआ है। इसलिए हरियाणा सरकार 5 जून 2019 को आदेश जारी किया था कि इस कैटेगरी में पिछड़ों के कोटे की नौकरियों को फिलहाल आगामी आदेशों तक सामान्य वर्ग के रूप में माना जाएगा।
उधर, पंजाब में तो सभी कैटेगरी के अंतर्गत पिछड़ों को सिर्फ कोटा का 10 प्रतिशत लाभ ही मिल पा रहा है। पंजाब सरकार के अफसरों ने बैठक में बताया कि पहले ये इस कोटे का लाभ सिर्फ 7 प्रतिशत था, मौजूदा सरकार ने इसे बढ़ाया है और आगे इसे 13 प्रतिशत किए जाने पर भी विचार चल रहा है। जबकि आयेाग के चेयरमैन डा. भगवान लाल सहनी के अनुसार पिछड़ों को उनकेतय कोटे 27 प्रतिशत का पूरा लाभ हरियाणा और पंजाब में मिलना चाहिए।
दो साल से बंटी ही नहीं प्री-मैट्रिक स्कॉलरशिप
आयोग इस बात से भी काफी खफा दिखाई दिया कि हरियाणा में पिछले दो साल से पिछड़े वर्ग के छात्रों को स्कॉलरशिप बांटने में खासी लापरवाही बरती गई। इस पर भी आयोग ने अफसरों से जवाब तलब किया है। आयोग के समक्ष रखे आंकड़ों के तहत हरियाणा में वर्ष 2016-17 में 38390 पिछड़ा वर्ग छात्रों को 383.90 लाख प्री मैट्रिक स्कॉलशिप बांटी गई।
वर्ष 2017-18 में सिर्फ 4506 छात्रों को 13.48 लाख बांटे गए। हैरत की बात यह कि वर्ष 2018-19 व वर्ष 2019-20 में तो छात्रों को स्कॉलरशिप ही नहीं बांटी गई। इसी तरह पोस्ट मैट्रिक स्कॉलशिप के तहत वर्ष 2016-17 में पिछड़े वर्ग के19348 छात्रों को 512.16 लाख, वर्ष 2017-18 में 27388 छात्रों को 852.46 लाख व वर्ष 2018-19 में 31174 छात्रों को 683.94 लाख की स्कॉलरशिप बांटी गई। लेकिन वर्ष 2019-20 में अभी तक इस कैटेगरी में स्कॉलशिप बांटी ही नहीं गई है।
बीसी सर्टिफिकेट बनवाने में छूट जाते हैं पसीने
दोनों राज्यों में देखने को मिला है कि संबंधित अफसरों को पिछड़ा वर्ग के अंतर्गत आरक्षण लागू करने की पूरी तरह जानकारी ही नहीं है। उनकी भ्रांतियों की वजह से पिछड़ों को कोटे का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। ये भी देखने को आया है कि बीसी सर्टिफिकेट बनाने में भी बहुत परेशानियां हो रही है।
दोनों राज्यों के पिछड़ा वर्ग संगठनों ने अपनी कई तरह की परेशानियों से आयोग को अवगत करवाया है। इंडस्ट्रियल एरिया में बीसी वर्करों के लिए हॉस्टल सुविधा नहीं है। लॉ कालेजों, नवोदय स्कूलों व केंद्रीय स्कूलों में भी पिछड़े वर्ग का आरक्षण लागू हो गया है। इसकी जानकारी भी दोनों राज्यों के अफसरों को दी गई है।
- डॉ. भगवान लाल सहनी, चेयरमैन, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग
जाटों का कोई प्रतिनिधि मंडल आज तक नहीं मिला
पिछड़े वर्ग की सूची में खुद को शामिल करवाने के जाट समुदाय के लोगों ने हरियाणा में बड़ा आंदोलन किया था और आज भी ये समुदाय इसके लिए संघर्षरत है, आयोग इस आंदोलन को किस नजरिए से देखता है, इस सवाल पर राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की सदस्य एवं पूर्व सांसद सुधा यादव ने साफ कहा कि आज तक जाटा समुदाय का कोई भी प्रतिनिधिमंडल इस तरह की मांग को लेकर आयोग से नहीं मिला और न ही इस बाबत कोई रिप्रेजंटेशन दिया है। इसलिए आयोग ने इस पर अभी कोई विचार नहीं किया गया है।
- सुधा यादव, आयोग की सदस्य व पूर्व सांसद