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2017 सिंचाई घोटाला: हाईकोर्ट का आदेश-वीआईपी लोगों पर केस चलाने की अनुमति पर चार सप्ताह में निर्णय ले पंजाब 

Tue, 09 Nov 2021 12:13 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

सिंचाई घोटाले के मुख्य आरोपी गुरिंदर सिंह भाप्पा ने 2017 में पुलिस को दिए बयान में दो पूर्व मंत्रियों व उनके पीए तथा 3 आईएएस अधिकारियों को टेंडर के बदले करोड़ों रुपये देने की बात कबूली थी। मुख्य आरोपी के इस बयान के बावजूद सरकार ने अब तक किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की।
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पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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2017 के सिंचाई घोटाले में दो पूर्व मंत्री, उनके पीए और 3 आईएएस को करोड़ों रुपये की रिश्वत मामले में पंजाब सरकार द्वारा हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद कार्रवाई न करने की याचिका पर फिर से सुनवाई की मांग की गई है। हाईकोर्ट ने इस पर अब पंजाब सरकार को आदेश दिया है कि चार सप्ताह के भीतर वीआईपी लोगों पर केस चलाने की अनुमति पर निर्णय लिया जाए।

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याची ने बताया कि गुरिंदर सिंह भाप्पा ने बयान में इन वीआईपी लोगों का नाम लिया था। इसके बाद भी सरकार पर कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए सीबीआई जांच की मांग को लेकर जनहित याचिका दाखिल की गई थी। याची ने मामले की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की थी। हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए याची की शिकायत पर पंजाब सरकार को कानून के अनुरूप निर्णय लेने का आदेश दिया है। आदेश का पालन न होने के कारण अब बठिंडा निवासी हरमीत सिंह ने अर्जी दाखिल कर बताया कि इस दिशा में कोई कार्रवाई नहीं हुई है। हाईकोर्ट में पंजाब सरकार ने कहा कि जल्द ही इस पर निर्णय लिया जाएगा। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को मामले 4 सप्ताह की मोहलत देते हुए निर्णय लेने का आदेश दिया है।

यह है मामला 
बठिंडा निवासी हरमीत सिंह और अन्य ने याचिका दायर कर हाईकोर्ट को बताया कि इस घोटाले के मुख्य आरोपी गुरिंदर सिंह भाप्पा ने 2017 में पुलिस को दिए बयान में दो पूर्व मंत्रियों व उनके पीए तथा 3 आईएएस अधिकारियों को टेंडर के बदले करोड़ों रुपये देने की बात कबूली थी। मुख्य आरोपी के इस बयान के बावजूद सरकार ने अब तक किसी के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। याची ने बताया कि उसने गत वर्ष 30 जून को पंजाब के मुख्य सचिव सहित विजिलेंस विभाग को लीगल नोटिस भेज नामित किए गए सभी रसूखदारों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी। साथ ही यह भी मांग की थी कि मामले में जांच सीबीआई को सौंपी जाए, क्योंकि मामला हाई प्रोफाइल लोगों से जुड़ा है। 

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