पंजाब में अगर कोई नशीली दवाओं का कारोबार न करके आम दवाएं बेचना चाहता है तो उसे अब लाइसेंस मिल सकेगा। सेहत विभाग ने लाइसेंस जारी करने की नीति में बदलाव किया है। जिससे फार्मा कारोबार करने के इच्छुक लोगों और मौजूदा कारोबारियों को राहत मिलेगी।
ड्रग कंट्रोलर अजय सिंगला ने नीति में बदलाव की पुष्टि करते हुए कहा कि आम उत्पाद बेचने वालों को राहत दी गई है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में दायर एक याचिका की सुनवाई के दौरान 2010 में सेहत विभाग ने नई ड्रग पॉलिसी तैयार की थी। जिसके तहत दवाओं की दुकानों की बहुतायत रोकने के लिए भी कुछ नियम बनाए गए थे।
जिसमें पांच रिटेल लाइसेंस पर एक होलसेल लाइसेंस जारी करना और आबादी के मुताबिक रिटेल लाइसेंस देना शामिल था। इस कारण नई दुकानों को लाइसेंस मिलना ही बंद हो गए थे।
पंजाब केमिस्ट एसोसिएशन की मांग पर बदलाव
पंजाब केमिस्ट एसोसिएशन की मांग पर सेहत विभाग ने नीति में बदलाव किया है। उन लोगों को लाइसेंस जारी करने का फैसला किया गया है, जो नशीली दवाएं नहीं बेचेंगे। नई नीति के मुताबिक सर्जिकल इंप्लांट, डेंटल मैटीरियल, डायग्नॉस्टिक किट व रिएजेंट, ओटीसी ड्रग, मेडिकल डिवाइस और वेटरिनरी ड्रग का होलसेल कारोबार करने वालों को लाइसेंस जारी किए जाएंगे। लेकिन इनमें कोई हैबिट फॉर्मिंग ड्रग नहीं होनी चाहिए।
जो दवा निर्माता उसी परिसर में होलसेल लाइसेंस चाहते हैं, उन्हें भी जारी किया जाएगा। जिन लोगों ने ग्रामीण और अर्धशहरी इलाकों में होलसेल लाइसेंस लिया था और अब रिटेल कारोबार करना चाहते हैं, उन्हें होलसेल लाइसेंस सरेंडर करने पर रिटेल लाइसेंस जारी किया जाएगा, लेकिन उन्हें योग्य व्यक्ति नियुक्त करना होगा।
वे छह प्रतिबंधित साइकोट्रॉपिक ड्रग्स कोडीन, डेक्स्ट्रोप्रोपॉक्सीफीन, बुप्रोनॉर्फिन, निट्राजिपाम, पेंटाजोसिन नहीं बेच सकेंगे। इसकी इजाजत सिर्फ जरूरत पड़ने पर दी जाएगी।
डॉक्टर की इजाजत बनी मुसीबत
पंजाब केमिस्ट एसोसिएशन के प्रधान सुरजीत मेहता ने कहा कि लाइसेंस जारी करने की नीति में बदलाव कर सरकार ने बेरोजगारों को राहत दी है। लेकिन रिटेल लाइसेंस में डॉक्टर की इजाजत की शर्त मुसीबत बन गई है।
केमिस्ट शॉप खोलने के लिए विभाग ने शर्त रखी है कि नजदीकी डॉक्टर लिखकर देगा कि दवा दुकान की जरूरत है, तभी लाइसेंस मिलेगा। डॉक्टर या तो अपने करीबी के लिए लिखकर देगा, या फिर आर्थिक शोषण करेगा। सरकार को इस नीति में भी बदलाव करना चाहिए।