जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुई हिंसा मामले में शनिवार को पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने सरकार को कड़ी फटकार लगाई। सरकार की ओर से दाखिल शपथ पत्र में यह लिखे जाने पर कि कोर्ट इस मामले में हस्तेक्षप कर रहा है, हाईकोर्ट ने सरकार को जमकर लताड़ा।
इन दंगों की तुलना 1947 में हुए दंगों से करते हुए कहा की आजादी के बाद से ऐसे दंगे कही नहीं हुए थे और पंजाब में आतंकवाद के दौरान भी इतना नुकसान नहीं हुआ। बावजूद इसके सरकार कार्रवाई करने को तैयार नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि इन मामलों से कोर्ट पीछे नहीं हटेगी और हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सरकार सुप्रीम कोर्ट से स्टे ला सकती है। इस मामले की अगली सुनवाई 22 अक्तूबर को होगी।
आरक्षण आंदोलन के दौरान पूरे प्रदेश में हुई हिंसा और आगजनी के मामले में प्रदेश के वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के भाई की अर्जी पर हुई सुनवाई में कहा गया है कि पांच आरोपी जांच में शामिल हो चुके हैं जबकि तीन को भगौड़ा घोषित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि कुछ मामलों में राजनीतिक षड्यंत्र की जांच और कुछ बड़े राजनेताओं के नाम की आशंका के चलते इन मामलों की जांच सीबीआई को सौंपी गई है।