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आधारहीन पीआईएल दाखिल कर हीरो बनना बंद करें: हाईकोर्ट

Sat, 25 Feb 2017 01:22 AM IST
विवेक शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
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Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh - फोटो : File Photo
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‘स्कैम-स्कैम चिल्लाकर अदालत का दरवाजा खटखटाया जा रहा है और पीआईएल को ब्लैकमेलिंग का जरिया बनाया जाता है। आधारहीन याचिकाएं डालकर हीरो बनने का चलन बढ़ रहा है। किसी भी क्षेत्र में होने वाली घटना की जानकारी पुलिस थाने में दी जानी चाहिए, न कि इसके लिए सीधे हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएं।’ पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में लगातार बढ़ती आधारहीन याचिकाओं पर पीआईएल बेंच ने शुक्रवार को यह टिप्पणी की।
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बेंच ने कहा कि जनहित याचिका को जनहित का माध्यम ही होना चाहिए। इनका इस्तेमाल निजी हित साधने में नहीं होने दिया जाएगा। वहीं एक अन्य जनहित यचिका को खारिज करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि पीआईएल को ब्लैकमेलिंग का माध्यम बनाने की कोशिशें हो रही हैं। न्यायपालिका को ऐसी दूषित याचिकाओं से बचाना हमारी जिम्मेदारी है।

 विभिन्न योजनाओं व कार्यों को स्कैम बताते हुए इसकी हाई लेवल जांच या सीबीआई जांच की अपील वाली बढ़ती याचिकाओं पर हाईकोर्ट ने कहा कि कानून के अनुसार किसी भी अपराध की प्राथमिक सूचना नजदीकी थाने में दी जाती है लेकिन अब सीधा हाईकोर्ट आने का चलन बढ़ रहा है। इससे लगातार न्यायपालिका पर भार बढ़ रहा है। बेंच ने अपील की कि वैकल्पिक  कानूनी अधिकारों का इस्तेमाल पहले किया जाए और यदि वहां से इंसाफ नहीं मिलता तब हाईकोर्ट का रुख किया जाए। 
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वकीलों को भी दी हिदायत 

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo
‘समाज के लिए अपने स्तर पर भी उठाएं कदम’
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जनहित याचिका के माध्यम से समाज की सेवा करने में कोई बुराई नहीं है लेकिन इसके लिए पहले अपने स्तर पर भी समाज के लिए कोई कदम उठाया जाए। हाईकोर्ट में आधारहीन याचिकाएं डालनी बंद करें। हाईकोर्ट ने अजैब सिंह बनाम पंजाब सरकार मामले में पीआईएल के लिए दिशा निर्देश भी जारी किए थे परंतु उनकी पालना नहीं हो रही है। 

वकीलों को भी दी हिदायत 
पीआईएल बेंच ने वकीलों को स्पष्ट शब्दों में कहा कि हाईकोर्ट कोई पोस्ट ऑफिस नहीं है जहां स्टैंप लगा कर हर याचिका को सुना जाए। वकील अपने मुवक्किल के लिए केस लड़ते हैं लेकिन इससे पहले वे कोर्ट के अधिकारी होते हैं। यह उनकी भी जिम्मेदारी है कि आधारहीन मामले हाईकोर्ट में दाखिल न हों। इसके साथ ही यदि हाईकोर्ट के अलावा कोई और कानूनी विकल्प मुवक्किल के पास मौजूद हो तो अच्छे वकील की तरह उसे सही रास्ता दिखाना चाहिए। 
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