मुख्य सचिव को किया था तलब
संयुक्त सचिव ने कहा था कि इस पत्र के लिए मुख्यमंत्री से मंजूरी थी। ऐसे में हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को तलब कर लिया था। गुरुवार को आदेश के अनुरूप मुख्य सचिव इस मामले की फाइल के साथ पेश हुए। हाईकोर्ट ने इस फाइल को देखा और इसमें की गई कई नोटिंग पर सवाल खड़े किए। कोर्ट ने कहा कि ऐसा लगता है कि सरकार किसी और के लिए यह केस लड़ रही है। ऐसा कौन चहेता है जो इस पदोन्नति की प्रक्रिया में हमसे छूट गया। सरकार ने हाईकोर्ट के उठाए सवाल पर सफाई दी लेकिन हाईकोर्ट ने असंतुष्टि जता दी। हाईकोर्ट ने पदोन्नति से जुड़ी इस फाइल को सील कर रजिस्ट्रार ज्यूडिशियल को भेजने का आदेश दिया है। साथ ही जजों की पदोन्नति की सिफारिश नामंजूर होने की दलील देने वाले पत्र को चुनौती देने की याचिकाकर्ता को छूट दे दी है।
जवाब के लिए सरकार को एक सप्ताह का समय
याचिका में संशोधन कर याची इसे एक सप्ताह में दाखिल करेगा और इसके बाद जवाब के लिए सरकार को एक सप्ताह का समय दिया गया है। हाईकोर्ट ने इस मामले में सरकार को नोटिस जारी कर कर दिया है।
पत्र में अप्रासांगिक जजमेंट भेज रहा राज्य
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया गया कि हाईकोर्ट की सिफारिश के बाद केंद्र सरकार से राय मांगी गई थी। इस राय के बाद ही हाईकोर्ट की सिफारिश नामंजूर कर कोर्ट को यह पत्र भेजा गया था। हाईकोर्ट ने केंद्र की राय में दर्ज करवाई गई जजमेंट देखी तो पाया कि इस मामले में यह अप्रासांगिक हैं। कोर्ट ने कहा कि जो आया वैसे ही बिना विचार हाईकोर्ट में भेज दिया, राज्य सरकार का यह स्तर है और वे चाहते हैं कि जिला जज की नियुक्ति वह करें।
राज्य सरकार अड़ी, लंबित मामलों की संख्या 10 हजार बढ़ी
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की ओर से पेश हुए वकील ने बताया कि पिछले 9 माह में लंबित मामलों की संख्या में 10 हजार की बढ़ोत्तरी हुई है। हाईकोर्ट ने इस पर अफसोस जताया और कहा कि न जाने क्यों सरकार इस मामले में अड़ी हुई है। कोर्ट ने कहा कि न्यायपालिका में राजनीतिक दखल नहीं होना चाहिए।
पत्र की भाषा पर हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी
हाईकोर्ट ने कहा कि संविधानिक संस्थानों को किस प्रकार संबोधित किया जाता है, लगता है हरियाणा सरकार के अधिकारी जानते नहीं है। ऐसा प्रतीत होता है इन सभी को पत्र लेखन शैली सीखने के लिए किसी अच्छे संस्थान में भेजा जाना चाहिए।