पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि विभागीय चयन समिति तय प्रक्रिया का पालन करने में नाकाम रहती है तो ऐसे में चयन और भर्ती परिणामी न्याय की कसौटी पर खरा नहीं उतरता। ऐसे में हाईकोर्ट ने बिना ग्रेडेशन सर्टिफिकेट के पूरी की गई भर्ती को अधूरा मानते हुए चयन सूची को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि सरकार 11 साल पुरानी इस भर्ती को जारी रखने को लेकर फैसला करने को स्वतंत्र है।
खुशविंदर सिंह और अन्य याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट को बताया कि पंजाब जेल विभाग ने 12 अक्तूबर 2011 को नोटिस जारी कर 527 वार्डरों, ड्राइवरों और अन्य की भर्ती के लिए आवेदन आमंत्रित किए। इस भर्ती में तीन प्रतिशत पद खेल कोटा के थे और इन पदों को भरने के लिए तय प्रक्रिया के तहत स्पोर्ट्स ग्रेडेशन सर्टिफिकेट पर गौर करना अनिवार्य था। लेकिन बिना इस सर्टिफिकेट के भर्ती को पूरा कर लिया गया। ऐसे में यह भर्ती सही नहीं है।
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याचिका पर हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार से जवाब मांगा तो पंजाब सरकार ने स्वीकार किया कि इस सर्टिफिकेट पर गौर किए बिना ही नियुक्ति प्रक्रिया को पूरा किया गया है। हाईकोर्ट ने इस पर कहा कि विभागीय चयन समिति 10 दिसंबर 1987 के निर्देशों के अनुसार जारी किए गए प्रमाणपत्रों के आधार पर खिलाडिय़ों के चयन में विफल रही। चयन ऊंचाई, शैक्षिक योग्यता, साक्षात्कार के अंक, शारीरिक माप परीक्षण और शारीरिक दक्षता परीक्षण के आधार पर किया गया था।
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कोर्ट ने कहा कि समिति के पास निर्देशों की अवहेलना कर चयन प्रक्रिया को पूरा करने का कोई अधिकार नहीं था। निर्देशों व नियमों की अनदेखी करना उचित नहीं है। कोर्ट ने कहा कि चयनित उम्मीदवार यह दावा नहीं कर सकते कि वे प्रशिक्षण और प्रोबेशन अवधि पूरी होने के बाद चुने जाने के हकदार हैं। ऐसे में अदालत के पास खिलाड़ियों की श्रेणी के संबंध में चयन सूची को रद्द करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।