बठिंडा में आर्थिक अपराध के मामले में निलंबित की गई सजा के खिलाफ अर्जी पर बार-बार तारीख देने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने कड़ा रवैया अपनाते हुए जज पर ही सवाल खड़े कर दिए। हाईकोर्ट ने कहा कि जज ने इस अर्जी को न्यायिक कार्यवाही के स्थान पर परीकथा बना दिया। बठिंडा के जिला एवं सत्र न्यायाधीश को इस केस का जल्द निपटारा करवाने और प्रोग्रेस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है। साथ ही आदेश की प्रति ज्यूडिशियल अकादमी के निदेशक को सौंपने का आदेश देते हुए न्याय अधिकारियों को इस बारे में जागरूक करने को कहा है।
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याचिका दाखिल करते हुए धीरज बंसल ने बताया कि उसने आर्थिक लेन देन को लेकर नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट में शिकायत दी थी। इस मामले में अदालत ने आरोपी एक निजी कंपनी को दोषी करार देते हुए सजा सुना दी थी। सजा के खिलाफ एडिशनल सेशन जज की अदालत में अपील दाखिल हुई और उन्होंने सरकार को नोटिस जारी करते हुए अपील एडमिट कर सजा निलंबित कर दी। सजा निलंबित करने के आदेश के खिलाफ याची ने अर्जी दाखिल की लेकिन यह 2021 से लंबित पड़ी रही और बार-बार तारीख डाल दी गई। याची ने बताया कि आखिरी बार भी केवल मुख्य अपील पर सुनवाई हुई है बाकी पर नहीं।
हाईकोर्ट ने कहा कि याची की अर्जी लंबे समय से लंबित है और इसे बड़े आराम से लेते हुए जज ने न्यायिक कार्यवाही के स्थान पर परी कथा बना दिया। हाईकोर्ट ने अब बठिंडा के सेशन जज को केस का जल्द निपटारा सुनिश्चित करने का आदेश जारी किया है। इसके साथ ही 30 सितंबर तक प्रोग्रेस रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने इस विषय को गंभीर मानते हुए चंडीगढ़ ज्यूडिशियल अकादमी के निदेशक को आदेश जारी किया कि इस बारे में न्याय अधिकारियों को जागरूक किया जाए ताकि इस प्रकार की याचिकाएं लंबित न रहें। कोर्ट ने इस आदेश की प्रति उन्हें उपलब्ध करवाने का आदेश दिया है।