स्वतंत्रता सेनानियों के सभी कानूनी वारिसों को स्वतंत्रता सेनानी सम्मान पेंशन योजना के लिए आश्रित मानने के पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने आदेश दिए हैं। साथ ही हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि अगली सुनवाई तक आदेश का पालन किया जाए, नहीं तो पालन न होने के लिए दोषी अधिकारियों के नाम बताए जाएं।
मालविंदर सिंह बड़ैच ने एडवोकेट एचसी अरोड़ा के माध्यम से याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट के समक्ष स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रितों की परिभाषा का विस्तार करने के निर्देश दिए जाने की अपील की थी। याची ने हाईकोर्ट को को बताया था कि केंद्र सरकार ने स्वतंत्रता सेनानियों के आश्रितों को पेंशन के लिए जो स्कीम तैयार की है उसमें आश्रित की परिभाषा सीमित है।
योजना में स्वतंत्रता सेनानियों के माता-पिता और उनकी अविवाहित और बेरोजगार बेटी को ही इसका लाभ लेने के लिए पात्र माना था। याची ने कहा कि आजादी के इतने दशकों के बाद शायद ही किसी स्वतंत्रता सैनिक के माता-पिता जीवित हों और यह भी मुश्किल होगा कि स्वतंत्रता सैनिक की कोई ऐसी बेटी मिले जो अविवाहित हो। लिहाजा इस स्कीम का दायर बढ़ाया जाना चाहिए।