बाबा का श्रृंगार होने के बाद शाम छह बजे से सात बजे तक मेडिटेशन (मानसिक पूजा) किया जाता है। इस पूजा में कई भक्त और परिवार शामिल होते हैं। पूजा के बाद आरती होती है। इसके बाद श्रृंगार दर्शन के लिए भक्तों का शिवालय में पहुंचना शुरू होता है। बाबा को सजाने में चार से पांच घंटे लगते हैं। इस दौरान पुजारी को दो बार ब्रेक मिलती है। ब्रेक के बाद शुद्ध होने पर ही शिवालय में प्रवेश मिलता है।
रोज मेडिटेशन के बाद शृंगार दर्शन
मंदिर की प्रधान शकुंतला शर्मा और महासचिव सुभाष तलवार ने बताया कि हर सोमवार को महिला संकीर्तन मंडली की ओर से कीर्तन होता है। हर रोज मेडिटेशन के बाद श्रृंगार दर्शन होता है। श्रृंगार दर्शन के बाद रात में प्रसाद के लिए भक्तों की लंबी कतार लगती है। मंदिर कमेटी के पदाधिकारी, पुजारी और अन्य सेवादार भक्तों की सेवा में हमेशा तत्पर रहते हैं।