पंजाब के एजुकेशन कॉलेजों में बीएड के 21 हजार में से 5 हजार रिक्त पदों को ओपन कैटगिरी से भरने पर फैसला लेने के पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को आदेश दिए हैं। याचिका पर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि जब इतने लोगों को नौकरी नहीं दे सकते तो इतने कॉलेजों को मंजूरी देकर बेरोजगारों की फौज क्यों खड़ी की जा रही है। दुर्भाग्य है कि शिक्षकों को नौकरी के लिए टंकी पर चढ़ना पड़ता है।
याचिका दाखिल करते हुए फेडरेशन ऑफ सेल्फ फाइनेंस कॉलेज ऑफ एजुकेशन ने 21 हजार सीटों में से रिक्त 5 हजार सीटों पर ओपन कैटगिरी से प्रवेश देने की अनुमति मांगी थी। याचिका पर पंजाब सरकार ने कहा कि प्रवेश परीक्षा देने वालों की संख्या कुल सीटों से कम थी। इसके बाद कुछ ने एडमिशन ही नहीं लिया जिसके चलते 5 हजार सीटें रिक्त हैं। इन सीटों पर मेरिट को नजरअंदाज कर प्रवेश की अनुमति नहीं दी जा सकती।
इस पर हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि क्या राज्य सरकार हर साल 21 हजार शिक्षकों को नौकरी दे सकती है। ऐसा संभव नहीं है तो आखिर क्यों कॉलेजों को कुुकुरमुत्तों की तरह बढ़ने दिया गया। आज स्थित यह है कि दाएं देखो तो कॉलेज, बाएं देखो तो कॉलेज आगे देखो तो कॉलेज हर तरफ कॉलेज ही नजर आते हैं। हाईकोर्ट ने कहा कि मैनेजमेंट कोटा की 15 प्रतिशत सीट पर कम मेरिट वालों को पैसा लेकर एडमिशन देने की अनुमति दे दी जाती है।
लेकिन ऊंची मेरिट वाले को प्रवेश परीक्षा न देने के कारण वंचित कर दिया जाता है। इस प्रकार की व्यवस्था सही नहीं है। हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को याचिकाकर्ता एसोसिएशन के साथ मिलकर 5 हजार रिक्त सीटों पर प्रवेश को लेकर निर्णय लेने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया कि यदि निर्णय नहीं लिया गया तो अगली सुनवाई पर पंजाब के शिक्षा सचिव को तलब कर लिया जाएगा।