नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी की ओर से डिफॉल्ट जमानत की मांग वाली याचिका को खारिज करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि बिना एफएसएल रिपोर्ट के दाखिल चालान को अधूरा नहीं माना जा सकता। हाईकोर्ट ने बिना एफएसएल की रिपोर्ट के दाखिल चालान को पूर्ण मानते हुए याची को किसी भी प्रकार की राहत देने से इनकार कर दिया।
एफआईआर के अनुसार तरनतारन निवासी शिकायतकर्ता की 6 साल की पोती 9 अक्तूबर 2021 को दोपहर में कुलविंदर सिंह के घर गई थी। इसी बीच शिकायतकर्ता को कुछ आवाज सुनाई दी। जब वह घर के अंदर गई तो कुलविंदर वहां से भाग गया और बच्ची खून से लथपथ वहां पड़ी थी। शर्म के चलते कुछ दिन तक इस बारे में किसी को नहीं बताया। बाद में 14 अक्तूबर को शिकायत के बाद एफआईआर दर्ज की गई।
याचिका दाखिल करते हुए कुलविंदर ने बताया कि इस मामले में चालान पेश करते हुए एफएसएल की रिपोर्ट दाखिल नहीं की गई है। ऐसे में यह चालान अधूरा है और याची डिफॉल्ट जमानत का हकदार है। जस्टिस सुवीर सहगल ने कहा कि चालान के साथ पीड़िता का बयान, उसकी मां का बयान, दादी का बयान, मेडिकल, कपड़े आदि सौंपे गए हैं। ऐसे में चालान को अधूरा नहीं कहा जा सकता। एफएसएल की रिपोर्ट बाद में तथ्यों को जोड़ने का काम करेगी। निचली अदालत के फैसले पर मुहर लगाते हुए हाईकोर्ट ने आरोपी की जमानत की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया।