फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'सरकारी स्कूल में आने वाले छात्रों को स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट देने में आनाकानी ना करें प्राइवेट स्कूल'

Tue, 07 Jul 2020 10:43 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

  • याचिका का दायरा बढ़ाते हुए हाईकोर्ट ने हरियाणा को भी किया शामिल
  • चंडीगढ़ के स्कूली छात्रों के अभिभावकों को भी बनाया गया याचिका में पक्ष
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ व हरियाणा के प्राइवेट स्कूलों को दो टूक कहा है कि जो छात्र निजी स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूल में प्रवेश लेना चाहते हैं, उन्हें स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट देने में आनाकानी ना करें। मामला चंडीगढ़ से स्कूलों की फीस व बैलेंस शीट से जुड़ा था जिसमें अब हरियाणा को भी प्रतिवादी बनाया गया है।
विज्ञापन


चंडीगढ़ के स्कूलों को वेबसाइट पर बैलेंस शीट अपलोड करने व अभिभावकों से फीस की वसूली से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान यूटी प्रशासन ने बताया कि उन्होंने अपना जवाब सौंप दिया है लेकिन शिक्षा विभाग की बिल्डिंग कोरोना की वजह से सील होने के कारण यह रजिस्ट्री में दाखिल नहीं हो सका। यूटी प्रशासन ने इसके लिए समय देने की अपील की जिसे हाईकोर्ट ने मंजूर कर लिया।

इस दौरान अभिभावकों की ओर से दाखिल अर्जी पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अर्जी मंजूर करते हुए अभिभावकों को याचिका में पक्ष बना लिया है। हाईकोर्ट ने अभिभावकों से उनकी वित्तीय स्थिति को लेकर अगली सुनवाई पर हलफनामा सौंपने के भी आदेश दिए हैं। इसी दौरान हाई कोर्ट ने अब याचिका का दायरा और अधिक बढ़ाते हुए स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट को भी इसमें शामिल कर लिया है।
विज्ञापन


हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों को हिदायत दी कि वह ऐसे छात्रों को स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट देने में जरा भी आनाकानी ना करें जो खराब वित्तीय स्थिति के कारण प्राइवेट स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूल में दाखिला लेना चाहते हैं। अगली सुनवाई पर फूलों और सरकार की ओर से इस मामले में उनका पक्ष रखा जाएगा।
विज्ञापन

केवल कमाई और सस्ते जमीन के टुकड़े के लिए बनाए गए हैं ट्रस्ट

निजी स्कूलों को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान यूटी प्रशासन की ओर से कहा गया कि स्कूलों के पास धन की कमी नहीं है क्योंकि लॉकडाउन के बाद से स्कूल बंद है। ज्यादातर खूबसूरत के हैं और यह याचिका दाखिल करके यह साबित कर दिया गया है कि यह ट्रस्ट केवल कमाई और सस्ते जमीन के टुकड़े के लिए काम कर रहे हैं।

यूटी प्रशासन ने कहा कि संकट के इस दौर में इस प्रकार याचिका दाखिल करते हुए मुसीबत में पड़े इन लोगों से की वसूली की मांग इनकी नियत को दर्शाती है। यूटी प्रशासन ने स्कूलों की ओर से दाखिल की गई याचिका को सिरे से खारिज करने की हाई कोर्ट से मांग की। इसके साथ ही यह कहा गया कि यदि स्कूल को को आर्थिक तंगी है तो याचिका के साथ उन्हें इससे संबंधित दस्तावेज लगाने चाहिए थे जो नहीं किया गया।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें