हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ व हरियाणा के प्राइवेट स्कूलों को दो टूक कहा है कि जो छात्र निजी स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूल में प्रवेश लेना चाहते हैं, उन्हें स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट देने में आनाकानी ना करें। मामला चंडीगढ़ से स्कूलों की फीस व बैलेंस शीट से जुड़ा था जिसमें अब हरियाणा को भी प्रतिवादी बनाया गया है।
चंडीगढ़ के स्कूलों को वेबसाइट पर बैलेंस शीट अपलोड करने व अभिभावकों से फीस की वसूली से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान यूटी प्रशासन ने बताया कि उन्होंने अपना जवाब सौंप दिया है लेकिन शिक्षा विभाग की बिल्डिंग कोरोना की वजह से सील होने के कारण यह रजिस्ट्री में दाखिल नहीं हो सका। यूटी प्रशासन ने इसके लिए समय देने की अपील की जिसे हाईकोर्ट ने मंजूर कर लिया।
इस दौरान अभिभावकों की ओर से दाखिल अर्जी पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अर्जी मंजूर करते हुए अभिभावकों को याचिका में पक्ष बना लिया है। हाईकोर्ट ने अभिभावकों से उनकी वित्तीय स्थिति को लेकर अगली सुनवाई पर हलफनामा सौंपने के भी आदेश दिए हैं। इसी दौरान हाई कोर्ट ने अब याचिका का दायरा और अधिक बढ़ाते हुए स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट को भी इसमें शामिल कर लिया है।
हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों को हिदायत दी कि वह ऐसे छात्रों को स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट देने में जरा भी आनाकानी ना करें जो खराब वित्तीय स्थिति के कारण प्राइवेट स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूल में दाखिला लेना चाहते हैं। अगली सुनवाई पर फूलों और सरकार की ओर से इस मामले में उनका पक्ष रखा जाएगा।