चंडीगढ़ में बढ़ती पार्किंग की समस्या और अवैध पार्किंग को लेकर दाखिल याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ नगर निगम को जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। साथ ही पार्किंग पॉलिसी को लेकर भी प्रशासन को अगली सुनवाई पर जवाब दाखिल करना होगा।
याचिका दाखिल करते हुए सेक्टर 35 निवासी अनीत गोयल ने कहा कि जैसे-जैसे शहर में लोगों की संख्या और जीवन शैली में बदलाव हो रहा है यहां प्रति घर कारों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। वर्तमान में प्रति घर कार की संख्या 4 है जो शहर में पार्किंग की समस्या को पैदा करने के लिए काफी है। याची ने कहा कि चंडीगढ़ देश के सबसे व्यवस्थित और ग्रीनरी के मामले में सबसे बैलेंस शहरों की श्रेणी में गिना जाता है।
अवैध पार्किंग के चलते शहर की ग्रीन बेल्ट सिमट कर केवल 50 प्रतिशत रह गई है। जिस प्रकार से ग्रीन एरिया कम होता जा रहा है वह एक ओर तो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाला है और दूसरा यदि इसी रफ्तार से यह होता रहा तो शहर सिटी ब्यूटीफुल के अपने नाम के अर्थ को खो देगा। हालात से वाकिफ होते हुए भी अधिकारी इस दिशा में आंखें मूंदें बैठे हुए हैं। शहर में 2001 में पेड पार्किग आरंभ की गई थी। पार्किंग के दाम हर बार बढ़ाए गए लेकिन सुविधाओं के नाम पर टूटी-फूटी जगह, बंद पड़ी लाइटें और गंदगी के ढेर वाली पार्किंग लोगों को दी जा रही है। याची ने कहा कि अभी तक ग्रीन बेल्ट में पार्किंग करने वालों पर कार्रवाई कौन करे यह जिम्मेदारी तय नहीं है। ऐसे में यह जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए कि ग्रीन बेल्ट पर पार्किंग न हो।