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Highcourt News: अपराध असंज्ञेय तो छापे से पहले मजिस्ट्रेट की अनुमति जरूरी, सट्टा खेलने में दर्ज केस खारिज

Fri, 09 Dec 2022 10:09 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस ने गुप्त सूचना को आधार बनाते हुए सीधा छापा मार दिया और तय प्रक्रिया का पालन करना जरूरी नहीं समझा। हाईकोर्ट ने पुलिस के स्तर पर पाई गई खामियों को आधार बनाते हुए एफआईआर को रद्द करने का आदेश दिया है।
 
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
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विस्तार
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जालंधर में 25 जुलाई 2020 को सौरभ वर्मा के घर छापा मारकर सवा करोड़ रुपये, मोबाइल व लैपटॉप की बरामदगी के मामले में पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने एफआईआर को रद्द करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि जुआ खेलना असंज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है और ऐसे में मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना इस प्रकार छापा मारना कानून के अनुरूप ठीक नहीं है।
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याचिका दाखिल करते हुए जालंधर निवासी सौरभ वर्मा ने हाईकोर्ट को बताया कि 25 जुलाई, 2020 को पुलिस ने उसके घर छापा मारा था। इस दौरान उन्होंने सट्टा खेलने के आरोप में एफआईआर दर्ज कर याची को गिरफ्तार कर लिया था। याची ने कहा कि यह सब करते हुए मजिस्ट्रेट की अनुमति नहीं ली गई थी। पंजाब पुलिस ने कहा कि मौके पर याची पकड़ा गया था और इतनी बड़ी मात्रा में कैश बरामद किया गया है। 

हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि पुलिस ने तय प्रक्रिया के तहत कार्रवाई नहीं की है। हर मामले में जांच का तरीका अलग होता है और तय प्रक्रिया का पालन करना जरूरी होता है। असंज्ञेय मामलों में तो प्रक्रिया का पालन और अधिक आवश्यक हो जाता है। इस मामले में पुलिस ने गुप्त सूचना को आधार बनाते हुए सीधा छापा मार दिया और तय प्रक्रिया का पालन करना जरूरी नहीं समझा। हाईकोर्ट ने पुलिस के स्तर पर पाई गई खामियों को आधार बनाते हुए एफआईआर को रद्द करने का आदेश दिया है।
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