पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सात साल पहले दिए आदेश का अभी तक पालन न होने पर हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ को जमकर फटकार लगाई। हाईकोर्ट ने कहा कि कोर्ट के आदेश को हवा हवाई समझने की प्रवृत्ति सरकारें छोड़ दें। साल पहले हाईकोर्ट ने हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ को निर्देश दिया था कि वे अपनी फॉरेंसिक लैब को अपग्रेड करे व सभी एमएलआर व पीएमआर को कंप्यूटरीकृत कर उसे एक फार्मेट में वेबसाइट पर अपलोड करे।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया गया। सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार की तरफ से कोर्ट को बताया कि गया कि राज्य में स्टेट फॉरेंसिक लैब को अपग्रेड कर दिया गया है जिस कारण अब पेंडेंसी कम है। सरकार ने बताया कि स्टेट फॉरेंसिक लैब में पिछले साल मई माह तक विचाराधीन केस की संख्या 13314 थी जो अब सितंबर 2019 में केवल 3645 रह गई है। सुनवाई में पंजाब व चंडीगढ़ प्रशासन ने भी अपने केस स्टेटस की कोर्ट को जानकारी दी।
कोर्ट ने मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ के स्वास्थ्य सचिव को आदेश दिया कि वे हाईकोर्ट में हलफनामा दायर कर यह बताए कि राज्य के सभी अस्पतालों में क्या वीडियो कांफ्रेंस की सुविधा दी है, केमिकल जांच के लिए क्या सुविधा दी गई है और उसकी रिपोर्ट में कितना समय लगता है। हाईकोर्ट ने तीनों स्वास्थ्य सचिव को अपने राज्य के स्टेट फॉरेंसिक लैब के निदेशकों के हलफनामे भी देने का आदेश दिया जिसमें इस बात की जानकारी हो की डाक्टरों व स्टाफ को केमिकल जांच व कोर्ट में समन करने के दौरान किस तरह की परेशानी का सामना करना पड़ता है।