केस की सुनवाई के दौरान पत्नी के वकील ने हाईकोर्ट को बताया कि पति गुजारा भत्ता के तौर पर जो राशि देता है, वह केवल घर के किराए में निकल जाती है। पत्नी पर एक बेटी की परवरिश की जिम्मेदारी भी है। ऐसे में फैमिली कोर्ट द्वारा तय की गई राशि को बढ़ाया जाए। इस पर याची के वकील ने कहा कि याची की नौकरी अब छूट चुकी है और उसके पास कमाई का कोई जरिया नहीं है, इसलिए वह इस गुजारा भत्ता की राशि का भुगतान करने में भी असमर्थ है।
इस पर हाईकोर्ट ने पति की दलील को खारिज करते हुए कहा कि याची पढ़ा लिखा है और उसे नौकरी मिल ही जाएगी। लेकिन पत्नी के पास गुजारे का कोई साधन मौजूद नहीं है। उसकी पत्नी घर का खर्च व एक बच्ची का पालन भी कर रही है। ऐसे में भले ही पति की नौकरी छूट गई है, लेकिन उसे कोर्ट द्वारा तय की गई राशि का भुगतान पत्नी को प्रतिमाह करना ही होगा।