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हाईकोर्ट का नोटिस, अनिवार्य मृत्यु दंड के प्रावधान की सांविधानिक वैधता पर जवाब दे केंद्र सरकार

Thu, 21 Feb 2019 04:23 PM IST
खुशबू गोयल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
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कोर्ट
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एससी/ एसटी एक्ट में मौत की अनिवार्य सजा के प्रावधान की सांविधानिक वैधता पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब- तलब कर लिया है। एक्ट में एससी/एसटी वर्ग के व्यक्ति के खिलाफ ऐसे मामले में, जिसमें मौत की सजा का प्रावधान है, गैर एससी/एसटी व्यक्ति द्वारा झूठी गवाही या सबूत पेश करने की स्थिति में मौत की सजा का अनिवार्य प्रावधान है।
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शहर के सेक्टर 42 निवासी नेशनल लॉ स्कूल बैंगलोर के छात्र दक्ष कादियान की जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने यह नोटिस जारी किया है। याचिका में दक्ष ने एससी/एसटी एक्ट के सेक्शन 3 के सब सेक्शन 2 के सेक्शन 1 को चुनौती दी है। याची ने कहा कि इस प्रावधान के अनुसार यदि एससी या एसटी व्यक्ति पर ऐसे मामले में केस दर्ज हो, जिसमें मौत की सजा का प्रावधान हो और उसमें गैर एससी या एसटी व्यक्ति झूठी गवाही या सबूत पेश करे तो गैर एससी/एसटी व्यक्ति को अनिवार्य रूप से मौत की सजा दी जाएगी। याची ने कहा कि अनिवार्य रूप से मौत की सजा का प्रावधान आरोपी को सजा के मामले में बहस का मौका नहीं देता जो अन्याय है।

इसके साथ ही सीआरपीसी के सेक्शन 354 का सब सेक्शन 3 बताता है कि मौत की सजा सुनाने के लिए विशेष कारण बताना जरूरी होता है। इसके साथ ही अनिवार्य मौत की सजा का प्रावधान सुप्रीम कोर्ट द्वारा बचन सिंह बनाम पंजाब सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी आदेश के खिलाफ है। यह कोर्ट को जीवन या मृत्यु के निर्णय लेने की स्वतंत्रता छीनने वाला प्रावधान है। इसके साथ ही मिथु सिंह बनाम पंजाब सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अनिवार्य मौत की सजा के प्रावधान को असांविधानिक करार दिया था। चीफ जस्टिस कृष्ण मुरारी और जस्टिस अरुण पल्ली की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने के आदेश दिए हैं।
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