डीजीपी ने ऐसा जवाब दिया कि हाईकोर्ट के जज ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि गोमांस तस्करी और अपराध रोकना पुलिस के बस की बात नहीं है। लोगों की रक्षा करने की जिम्मेदारी जिस पुलिस पर है, उस पुलिस पर ही हमेशा जान जाने का खतरा बना रहता है। यह बात कोई और नहीं, बल्कि डीजीपी हरियाणा ने पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में बताई है। डीजीपी के इस रुख पर हाईकोर्ट ने कहा कि अब ऐसा लगता है कि गोमांस की तस्करी और अपराध पर नियंत्रण करना पुलिस के बस के बाहर है।
याचिका दाखिल करते हुए मेवात के नूंह निवासी इजराइल ने हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत दिए जाने की मांग की थी। वर्ष 2017 में उसके खिलाफ हरियाणा गोवंश संरक्षण व संवर्धन एक्ट-2015 और पशु क्रूरता एक्ट- 1960 के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने डीजीपी को तलब किया और पूछा कि पुलिस को पहले से ही खुफिया सूचना मिल जाती है। बावजूद इसके ज्यादातर मामलों में आरोपी कैसे मौके से फरार होने में कामयाब हो जाते हैं।
हाईकोर्ट ने पूछा कि इस एक्ट के तहत मेवात में कितनी एफआईआर दर्ज हुईं, कितने मामलों में आरोपी पुलिस की मौजूदगी में फरार हुए। कितने आरोपी फरार हैं, कितने आरोपियों को सजा हुई है और कितने बरी हुए हैं। हाईकोर्ट के आदेश के अनुरूप डीजीपी हाजिर हुए और हलफनामा दाखिल किया। हाईकोर्ट ने हलफनामे को देखकर कहा कि इसे पढ़कर स्थिति स्पष्ट हो गई है। गो तस्कर हार्डकोर अपराधी हैं, जो पूरी तरह से ट्रेंड हैं।
इस पर डीजीपी ने कहा कि जब पुलिस तस्करों को रोकती है तो वे उन पर फायरिंग करने लगते हैं। पुलिस पर फायरिंग के मामले में 30 एफआईआर भी दर्ज की गई हैं। ऐसे में पुलिस वालों की जान को हमेशा खतना बना रहता है।