चंडीगढ़ में दसवीं की छात्रा से रेप के मामले में बरी हुए जगतार सिंह को दोबारा चंडीगढ़ पुलिस में बहाल करने के कैट के आदेश के खिलाफ दाखिल यूटी प्रशासन की याचिका पर हाईकोर्ट ने कैट और जगतार सिंह को नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही दोनों से पूछा है कि क्यों न बहाली के आदेश पर रोक लगा दी जाए।
यूटी प्रशासन की ओर से एडवोकेट विकास चतरथ ने याचिका दाखिल करते हुए बताया कि जगतार सिंह के खिलाफ 19 दिसंबर 2013 को पोक्सो एक्ट में एफआईआर दर्ज की गई थी। उस पर दसवीं कक्षा की छात्रा से रेप का आरोप था। इसके चलते प्रशासन ने उसे 20 दिसंबर को बर्खास्त कर दिया। इसके बाद ट्रायल चलता रहा और पीड़िता के बयान से पलटने के चलते जगतार सिंह को बेनिफिट ऑफ डाउट के तहत चंडीगढ़ जिला अदालत ने 11 नवंबर 2014 को बरी कर दिया।
इसके बाद जगतार ने डीआईजी को रिप्रेजेंटेशन देकर बर्खास्तगी के आदेश रद्द कर सेवा में बहाल किए जाने की अपील की जो खारिज कर दी गई। इसके बाद उन्होंने एसएसपी से भी ऐसी ही अपील की जो यह कहते हुए खारिज कर दी गई कि बर्खास्तगी के खिलाफ अपील का प्रावधान नहीं है। इसके खिलाफ कैट में याचिका दाखिल की गई।
याचिका में जारी नोटिस के जवाब में प्रशासन ने बताया था कि बर्खास्तगी के खिलाफ अपील करने के लिए एक्ट के अनुसार 1 साल की सीमा तय है और याची ने इसके बाद कैट में याचिका दाखिल की है। दूसरा यह भी बताया गया कि क्रिमिनल केस में बरी होना विभागीय कार्रवाई में राहत का आधार नहीं होता है। इसके बावजूद कैट ने जगतार को दोबारा सर्विस में लाने के 4 अक्तूबर 2017 को आदेश जारी कर दिए। अब प्रशासन ने आदेश रद्द करने और याचिका लंबित रहते आदेश को सस्पेंड रखने की अपील की है। हाईकोर्ट ने याचिका पर जगतार सिंह और कैट को नोटिस जारी करते हुए पूछा है कि क्यों न 4 अक्तूबर 2017 के आदेश पर रोक लगा दी जाए।