चार साल की बच्ची से दुष्कर्म के दोषी की उम्रकैद की सजा के खिलाफ अपील पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सिरे से खारिज करते हुए सजा बरकरार रखी है। हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि केवल बच्ची की गवाही भी उसे दोषी करार देने के लिए पर्याप्त है।
याचिका दाखिल करते हुए संजय ने हाईकोर्ट में फरीदाबाद की सेशन कोर्ट द्वारा सुनाई उम्रकैद की सजा को चुनौती दी थी। आरोप के अनुसार संजय की दुकान पर 4 साल की बच्ची दही लेने आई थी। इसके बाद याची ने उसके साथ दुष्कर्म किया जिसके बारे में बच्ची ने परिजनों को बताया।
रिजनों की शिकायत पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज करके संजय को गिरफ्तार कर लिया था। जब ट्रायल चला तो बच्ची के परिजनों ने संजय को पहचानने से इनकार कर दिया। इसके बाद बच्ची से सवाल किए गए, जिसमें उसने बताया कि संजय ने उसकेसाथ गलत काम किया है।
इस बयान को आधार बनाकर ट्रायल कोर्ट ने संजय को उम्रकैद की सजा सुना दी। इस सजा के खिलाफ संजय ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में कहा गया कि बच्ची की गवाही के अतिरिक्त उसके खिलाफ कोई सबूत या गवाह नहीं है।
हरियाणा सरकार ने इसके विरोध में कहा कि मेडिकल जांच में सामने आया है कि बच्ची से दुष्कर्म की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। ऐसे में याची को किसी भी प्रकार की राहत नहीं दी जानी चाहिए।
हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले पर मोहर लगाते हुए कहा कि यदि बच्ची सवालों को समझ रही है और उसका सही जवाब दे रही है तो उसका बयान अकेला ही आरोपी को दोषी करार देने के लिए पर्याप्त है। इस टिप्पणी केसाथ ही हाईकोर्ट ने अपील को सिरे से खारिज करते हुए आरोपी की सजा बरकरार रखी है।