नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ देश भर में हो रहे प्रदर्शन के चलते हरियाणा के नूंह में दो माह के लिए धारा 144 लगाने को चुनौती देने वाली याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। कोर्ट ने याची को फटकार लगाते हुए कहा कि यदि धारा 144 हटाने के बाद कोई अप्रिय घटना हुई तो क्या याची इसकी जिम्मेदारी लेने को तैयार है।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रवि शंकर झा व जस्टिस अरुण पल्ली की खंडपीठ ने कहा कि स्थानीय प्रशासन ने किसी अप्रिय घटना के अंदेशे के बाद ही यह निर्णय लिया होगा। प्रशासन को कुछ सूचनाएं मिली होंगी जिसके आधार पर कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए यह धारा लगाई गई है। कोर्ट ने कहा कि हमे नहीं पता वहां क्या हालत हैं और यह धारा लगाई जानी चाहिए या नहीं।
यह तय करना स्थानीय प्रशासन का काम है और अगर हाईकोर्ट ने इस याचिका को स्वीकार करते हुए धारा 144 के आदेश रद्द कर देता है तो क्या कोई अप्रिय घटना घटी तो याची इसकी जिम्मेदारी लेगा। इस पर याचिकाकर्ता मोहम्मद अरशद का कोई जवाब न मिलने पर हाईकोर्ट ने याचिका को सिरे से खारिज कर दिया।
याची ने याचिका दायर कर दो माह के लिए धारा 144 लगाने को संविधानिक अधिकारों का हनन बताते हुए इस आदेश को रद्द करने की मांग की थी। याची ने कहा था कि हाल के दिनों में हुए प्रदर्शनों के बाद हरियाणा सरकार ने नूंह में दो माह के लिए धारा 144 लगाने का निर्णय लिया है। इस तरह से जिले में धारा-144 लगा कर यहां के स्थानीय निवासियों के संविधानिक अधिकारों का हनन किया गया है। ऐसे में हाईकोर्ट से इसमें दखल दिए जाने की मांग की गई थी, जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है।