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हाईकोर्ट का फैसला: अंबाला शहर में नगर निगम और कैंट में परिषद रहेगा, लोगों को मिलेगी बड़ी राहत

Tue, 23 Jul 2019 02:55 PM IST
खुशबू गोयल मुनीष कुमार, अमर उजाला, अंबाला सिटी(हरियाणा)
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo
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हरियाणा के अंबाला शहर में नगर निगम को भंग करने और न करने के मामले पर पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। करीब एक साल बाद हाईकोर्ट ने इस मामले में अपना फैसला देते हुए कैबिनेट द्वारा लिए गए फैसले पर मुहर लगा दी। अब शहर में नगर निगम और छावनी में नगर परिषद रहेगा। हाईकोर्ट ने अपने इस फैसले के बाद केस को डिस्पॉज ऑफ कर दिया।
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इस फैसले के साथ ही अंबाला प्रदेश का ऐसा पहला जिला बन गया है, जिसके शहरी क्षेत्र में नगर निगम और नगर परिषद दोनों ही होंगे। अब शहर से सटे 12 गांव की पंचायतों को भंग किया जाएगा, क्योंकि यह गांव अब शहर नगर निगम के अधीन होंगे। वहीं अंबाला छावनी में 9 वार्ड की जगह करीब 31 वार्ड तक हो सकते हैं। बता दें कि कैबिनट मंत्री अनिल विज की मांग थी कि अंबाला नगर निगम को भंग किया जाए। उनके अनुसार नगर निगम अंबाला में शामिल हुए 27 गांवों का आज तक विकास नहीं हुआ।

अंबाला छावनी और शहर के बीच आवागमन की दूरी 20 किलोमीटर से अधिक है। आयुक्त शहर में बैठते हैं और संयुक्त आयुक्त छावनी में। वहीं जनता को अपने कार्यों के लिए जगह-जगह भटकना पड़ता है। वार्ड भी इतने बड़े-बड़े हैं कि खुद पार्षद तक अपने वार्ड के चक्कर नहीं लगा पाते। इसलिए मंत्री विज की सिफारिश पर फरवरी 2018 में सरकार ने अंबाला नगर निगम को भंग कर दिया था। मगर, वार्ड 12 के पार्षद जरनैल सिंह ने हाईकोर्ट में नगर निगम को भंग करने के सरकार के फैसले को चुनौती दी थी।
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यह गांव होंगे अंबाला नगर निगम में शामिल

पूर्व में अंबाला सिटी और कैंट विधानसभा क्षेत्र को जोड़कर अंबाला नगर निगम का गठन किया गया था। नगर निगम में आसपास क्षेत्र के 26 गांव जोड़े गए थे, जिनमें 18 गांव कैंट और शेष गांव सिटी जोन में थे। अब फिर से शहर में नगर निगम रखने के लिए 3 लाख की आबादी होनी अनिवार्य है, लेकिन अंबाला शहर की वर्तमान आबादी 2 लाख 80 हजार थी। ऐसे में सरकार ने इसमें आसपास के 12 गांव, जिनमें डांगदेहरी, मानकपुर, लोहगढ़, द्दियाना, देवी नगर, निजामपुर, घेल कलां, घेल खुर्द, कंवाला, कंवाली, कालू माजरा और लिहारसा को अंबाला में जोड़ आबादी 3 लाख कर दी गई।

अब छावनी में और सिटी में 20 होंगे वार्ड
वर्तमान में अंबाला शहर में 11 और छावनी में 9 वार्ड हैं। छावनी में ही परिषद बनने के बाद अब अधिकतम 31 वार्ड तक सरकार बना सकती है, जबकि शहर में 11 की बजाए अब 20 वार्ड तक हो सकेंगे, क्योंकि शहर में भी जो 11 वार्ड थे उनका दायरा बहुत बड़ा था।

जनता को राहत, खजाने को लगेगी चपत
छावनी से नगर निगम भंग होने के कारण जनता को विभिन्न टैक्स में राहत मिलेगी, लेकिन इससे सरकारी राजस्व घट जाएगा। नगर निगम भंग होने से प्रॉपर्टी टैक्स और डोर टू डोर टैक्स के बोझ तले दबी जनता को राहत मिलेगी। वर्तमान की बात करें तो इस साल प्रापर्टी टैक्स 22 करोड़ रुपये तय किया गया था। इसके अलावा डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन पर प्रति माह 1.61 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
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इस तरह वसूला जाता है नगर निगम एरिया में संपत्ति कर

- हाउस टैक्स 75 पैसे प्रति गज, 300 गज तक। 300 गज से ज्यादा पर 3 रुपये प्रति गज।
- कॉमर्शियल भवनों पर 18 रुपये प्रति गज, 50 गज तक। इससे ज्यादा पर 27 रुपये प्रति गज।
- इंडस्ट्रियल भवनों से 3.75 रुपये प्रति गज, 2500 गज तक, इससे ज्यादा पर 4.50 रुपये प्रति गज।
- इंस्टीट्यूशनल भवनों पर 9 रुपये प्रति गज, 2500 गज तक, इसके बाद 5 हजार गज तक 13.50 रुपये प्रति गज।

नगर परिषद में यह होंगे रेट
नगर परिषद बनते ही हाउस टैक्स 75 पैसे प्रति गज के बजाय 45 पैसे प्रति गज देना होगा। कॉमर्शियल भवनों पर यह 18 रुपये के बजाय 9 रुपये प्रति गज लगेगा।

परिषद बनने से छावनी में डोर टू डोर कूड़ा उठान के भी घटाने पड़ेंगे रेट
वर्तमान की बात करें तो नगर निगम अभी विभिन्न 23 वर्गों से 50 रुपये से लेकर 7500 रुपये कूड़ा उठाने के लिए प्रति माह वसूल रहा है। घरों से जहां न्यूनतम 50 रुपये वसूले जाते हैं, वहीं कॉमर्शियल संस्थानों, जिनमें अस्पताल भी शामिल हैं से 7500 रुपये तक वसूल सकता है। इसके अलावा 2500 रुपये स्कूलों व संस्थानों से कूड़े के वसूले जा रहे हैं। नगर निगम भंग होने से कूड़ा उठाने के रेट पर भी असर पड़ना तय माना जा रहा है।
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