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वाहन चालक का लाइसेंस फर्जी तो भी बीमा कंपनी को करना होगा क्लेम का भुगतान: हाईकोर्ट

Tue, 07 Jan 2020 10:34 AM IST
खुशबू गोयल विवेक शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
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पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बेहद अहम फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि यदि ड्राइवर का लाइसेंस अवैध हो तो भी बीमा कंपनी को बीमा राशि का भुगतान करना होगा। अपने फैसले में हाईकोर्ट ने कहा कि लाइसेंस अवैध होने की दलील देते हुए बीमा कंपनी अपनी जिम्मेदारी से नहीं भाग सकती है। मामला 2011 का है जब एक कैंटी चालक ने मोटर साइकिल पर सवार जगाधरी निवासी गुलशन कुमार को टक्कर मार दी थी और हादसे में उसकी मौत हो गई थी।
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मृतक के आश्रितों की याचिका पर मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल ने करीब पौने छह लाख रुपये मृतक के परिवार को मुआवजा जारी करने का आदेश दिया था। बीमा कंपनी ने वहां कहा था कि ड्राइवर का लाइसेंस मथुरा का है और जब वहां पता लगवाया गया तो यह सामने आया कि लाइसेंस फर्जी है। ऐसे में बीमा कंपनी मुआवजे का भुगतान तो कर देगी, लेकिन इसकी वाहन मालिक से वसूली का कंपनी को अधिकार दिया जाए। एमएसीटी ने इस मामले में बीमा कंपनी को रिकवरी का अधिकार दे दिया था जिसे वाहन मालिक ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।

वाहन मालिक ने कहा कि जब उन्होंनेे ड्राइवर को रखा तो उसका ड्राइविंग टेस्ट लिया और वह वाहन अच्छी तरह चला लेता था। ड्राइवर ने उन्हें लाइसेंस भी दिखाया था जो ठीक लग रहा था। उसे ड्राइवर रखने के दो साल बाद यह हादसा हुआ है। हाईकोर्ट ने केस से जुड़े विभिन्न पहलुओं को सुनने के बाद अपना फैसला सुनाते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि बीमा कंपनी को ड्राइवर के साथ हुए हादसे की स्थिति में भुगतान करना ही होगा। लाइसेंस सही न होने, फर्जी होने या वैध न होने की दलील देते हुए बीमा कंपनी अपनी जिम्मेदारी से भाग नहीं सकती है।
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साथ ही हाईकोर्ट ने कहा कि बीमा कंपनी की यह दलील की उसे क्लेम भुगतान करने के बाद वाहन मालिक की रिकवरी का अधिकार देने की अपील भी नहीं मानी जा सकती है।
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