सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति के लिए मौजूदा कोलेजियम सिस्टम को रद किए जाने की मांग करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में दायर की गई याचिका को वीरवार को हाईकोर्ट के जस्टिस राजेश बिंदल व जस्टिस दर्शन सिंह की खंडपीठ ने खारिज कर दिया।
खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि सुप्रीम कोर्ट ऐसे ही एक मामले को लेकर दायर याचिका खारिज कर चुकी है, लिहाजा याचिका निराधार है और इसे खारिज किया जाता है। याचिकाकर्ता गुड़गांव में निचली अदालत के वकील सत्यवीर शर्मा की ओर से हाईकोर्ट में जनहित याचिका के रूप में यह मामला लाया गया था।
याचिका में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में जजों की नियुक्ति की मौजूदा कोलेजियम व्यवस्था के तहत केवल हाईकोर्ट के वकीलों को तरजीह दी जा रही है, जबकि इससे कहीं अधिक संख्या में वकील जिला अदालतों और विभिन्न ट्रिब्यूनलों में प्रैक्टिस कर रहे हैं और वे भी उतने ही काबिल हैं, जितने हाईकोर्ट के वकील।
याचिका में कहा गया कि कोलेजियम व्यवस्था के जरिये 90 प्रतिशत से अधिक वकीलों को जज के तौर पर नियुक्त होने का अवसर ही नहीं मिल पा रहा।
इस याचिका पर वीरवार को फैसला सुनाते हुए हाईकोर्ट की डबल बेंच ने कहा कि ऐसी कोई व्यवस्था ही नहीं है कि जिला अदालत और ट्रिब्यूनल के वकीलों को जज के तौर पर नियुक्त नहीं किया जा सकता हो।
इस पर याचिकाकर्ता ने कहा कि चाहे ऐसी कोई पाबंदी नहीं है, लेकिन आज तक ऐसा कभी देखने में भी नहीं आया कि किसी जिला अदालत के वकील को हाईकोर्ट का जज नियुक्त किया गया हो।
इस पर हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की ओर से ऐसी ही मांग को लेकर दायर याचिका पर दिए फैसले का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें ऐसा कोई कारण या आधार नजर नहीं आता, जिसके तहत इस मामले में दखल दिया जाए, लिहाजा हाईकोर्ट इस याचिका को खारिज करती है।