पंजाब में 90 सहायक जिला अटॉर्नी को नियमित किए जाने के फैसले को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। वीरवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस जसवंत सिंह ने पंजाब सरकार और प्रॉसिक्यूशन एंड लिटिगेशन डिपार्टमेंट के निदेशक को 17 नवंबर के लिए नोटिस जारी किया है।
याची गुरिंदर सिंह व 21 रेगुलर सहायक जिला अटॉर्नी की ओर से दायर याचिका में 90 सहायक जिला अटॉर्नी को नियमित किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए कहा गया है कि पंजाब सरकार ने फरवरी 2010 में 90 सहायक जिला अटॉर्नी को एक वर्ष के लिए कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्त किया था।
इसके बाद सरकार ने मार्च 2011 में कॉन्ट्रैक्ट, दिहाड़ी पर काम कर रहे कर्मचारियों और वर्क चार्ज कर्मियों को नियमित करने की नीति बनाई। इसके तहत यह फैसला लिया गया कि इसके बाद न तो किसी अन्य को नियमित किया जाएगा और न ही नियमित करने के लिए नए पद सृजित किए जाएंगे।
सरकार ने नियमित करने की प्रक्रिया को छह माह में पूरा करने का निर्णय भी लिया था। याचिका में कहा गया है कि इस निर्णय के बावजूद पंजाब सरकार ने अक्तूबर 2013 में नीति का उल्लंघन कर कॉन्ट्रैक्ट पर नियुक्त 90 सहायक जिला अटॉर्नी को नियमित करने का निर्णय ले लिया।
याची के वकील कपिल कक्कड़ ने हाईकोर्ट को बताया कि सरकार ने 90 सहायक जिला अटॉर्नी को नियमित करने के लिए नियमों का उल्लंघन किया। वहीं सुप्रीम कोर्ट द्वारा ऐसे ही एक मामले में सुनाये गए फैसले को भी अनदेखा किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि केवल क्लास-3 और क्लास-4 कर्मियों को ही नियमित किया जा सकता है। एडवोकेट कक्कड़ ने हाईकोर्ट को बताया कि सहायक जिला अटॉर्नी क्लास-2 में आते हैं। इसलिए इन्हें नियमित करके पंजाब सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन किया है।