धोखाधड़ी के मामले में आरोपी राजीव कुमार ने अग्रिम जमानत के लिए हाईकोर्ट से गुहार लगाई थी। याची ने आरोपों को नकारते हुए कहा था कि वह जांच में सहयोग करने के लिए तैयार है, ऐसे में उसे जमानत दी जाए।
जिस अपराध में अधिकतम सजा सात वर्ष तक की हो उस अपराध में आरोपी को गिरफ्तार करने में पुलिस को जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा पुलिस को नसीहत देते हुए सोनीपत निवासी राजीव कुमार को अग्रिम जमानत का आदेश जारी किया है।
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हाईकोर्ट ने कहा कि याची पर पहली बार इस तरह का आरोप लगा है और इस मामले में सजा सात साल से कम है। याची को सुधरने का मौका दिया जाना चाहिए। ऐसे में वह अग्रिम जमानत का हकदार है। कोर्ट ने कहा कि जिन मामलों में सजा सात साल से कम हो उनमें जांच अधिकारी को आरोपी की गिरफ्तारी में जल्दबाजी नहीं दिखाई जानी चाहिए। जांच को प्रभावित होने से बचाने, सबूतों से छेड़छाड़ न हो, गवाहों को प्रभावित न किया जा सके इसके लिए आरोपी पर कड़ी शर्तें लगाई जा सकती हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट अर्नेश कुमार मामले में सभी राज्यों को आदेश जारी कर चुका है कि जिन अपराधों में सजा सात साल से कम हो वहां पर आरोपी की ऑटोमेटिक गिरफ्तारी से पुलिस को बचना चाहिए। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि जमानत की स्थिति में आरोपी को विकल्प दिया जाना चाहिए कि वह बॉंड भरना चाहता है या एफडी करवाना चाहता है। आरोपी अपने विवेक के अनुरूप इन दोनों में से किसी एक विकल्प पर चयन कर सकता है। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने जमानत याचिका मंजूर करते हुए याची को अग्रिम जमानत दे दी।