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बेटी की हत्या के दोषी पिता की सजा रद्द: हाईकोर्ट ने कहा-हर घर में डंडा मौजूद, यह दोषी करार देने का आधार नहीं

Fri, 23 Sep 2022 03:55 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

जालंधर निवासी सुरिंदर पाल ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए जालंधर सेशन कोर्ट द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस ने हत्या के लिए इस्तेमाल डंडे की रिकवरी की लेकिन इस पर खून का कोई कतरा नहीं था।
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court - फोटो : istock
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विस्तार
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अपनी ही बेटी की हत्या के मामले में दोषी करार दिए गए पिता को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने दोषमुक्त करार दिया और उम्रकैद की सजा के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि इस देश में हर घर में डंडा मिल जाएगा इसे आधार बनाकर किसी को दोषी करार नहीं दिया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट, फॉरेंसिक रिपोर्ट आदि के बिना इस मौत को हत्या करार नहीं दिया जा सकता।

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यह भी पढ़ें : बड़ी सफलता: पंजाब पुलिस ने किया ISI समर्थित आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़, हथियारों के साथ दो गिरफ्तार 

जालंधर निवासी सुरिंदर पाल ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए जालंधर सेशन कोर्ट द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को चुनौती दी थी। एफआईआर के अनुसार 8 सितंबर 2008 को शिकायतकर्ता शकुंतला व उसकी बेटी गुरप्रीत कौर खेत से काम कर लौटे थे। इस दौरान उसने देखा कि उसका पति शराब की बोतल लेकर बैठा है। उसने पति को शराब पीने से मना किया तो उसने पीटना आरंभ कर दिया। इस बीच शिकायतकर्ता को बचाने के लिए उसकी बेटी बीच में आ गई। इसके बाद पति ने बेटी को कमरे में ले जाकर पीटना आरंभ कर दिया। बाप की पिटाई से बेटी की मौत हो गई। अगले दिन सुबह मृत बेटी का श्मशान में अंतिम संस्कार कर दिया गया। 
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इस मामले में जालंधर की सेशन कोर्ट ने पति को उम्रकैद की सजा सुना दी। कोर्ट ने याची पक्ष और सरकार की दलीलों को सुनने के बाद कहा कि इस मामले में ट्रायल कोर्ट ने याची को सजा सुनाते हुए गलती की। कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता की बेटी को याची पीटता रहा और शिकायतकर्ता ने पड़ोस में किसी से मदद नहीं मांगी और न पुलिस को सूचना दी। बच्ची का अंतिम संस्कार अगले दिन सुबह किया गया लेकिन तब भी किसी ने पुलिस को सूचित नहीं किया। यह बात शिकायतकर्ता के बयान पर अविश्वास करने का कारण बनती है। 

डंडे पर नहीं मिला था खून का निशान

पुलिस ने हत्या के लिए इस्तेमाल डंडे की रिकवरी की लेकिन इस पर खून का कोई कतरा नहीं था। डंडा देश के हर घर में मिल जाएगा लेकिन इस पर खून के और याची की उंगलियों के निशान के बिना किसी को हत्या का दोषी करार नहीं दिया जा सकता। 

प्रेमी जोड़े को सुरक्षा दिलाने पहुंचे वकील की गाड़ी पर हमला 

प्रेमी जोड़े को सुरक्षा दिलाने के लिए अपने साथ लाए वकील की कार पर हमले पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने चिंता जताते हुए एसएसपी से जवाब तलब कर लिया है। ऐसी घटना क्यों हुई और भविष्य में ऐसा न हो इसके लिए क्या कदम उठाए जाएंगे, इस बारे में एसएसपी को जानकारी सौंपनी होगी।

मामला प्रेमी जोड़े की सुरक्षा से जुड़ी याचिका का है। प्रेमी जोड़ा 21 सितंबर को अपने वकील के साथ हाईकोर्ट परिसर में पहुंचा था। हाईकोर्ट में कार पहुंचते ही लड़की के परिजनों ने कार पर हमला कर दिया और लड़की को उतारने का प्रयास किया। इस दौरान कार का शीशा तोड़ने का प्रयास किया गया। घटना केवक्त पास में मौजूद पुलिसकर्मियों ने हमलावरों को कार से दूर किया और प्रेमी जोड़े को सुरक्षित किया। इसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की 5 में से तीन आरोपियों  को गिरफ्तार कर लिया। दो लोग फरार हैं। 

सिंगल बेंच में चल रहे इस मामले को घटना केबाद मुख्य न्यायाधीश के पास भेज दिया गया। मुख्य न्यायाधीश ने इसे खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए भेजा। खंडपीठ ने अब इस मामले में दर्ज एफआईआर से जुड़ा पूरा रिकार्ड पेश करने का आदेश दिया है। साथ ही प्रेमी जोड़े की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी चंडीगढ़ के एसएसपी को सौंपी है। 
 
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एचसीएस व आईएएस पदों पर पुलिस अफसरों की नियुक्ति के लिए बदले नियम

हरियाणा में आईएएस और एचसीएस के पदों पर पुलिस अधिकारियों की नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट को जवाब सौंपते हुए प्रदेश सरकार ने बताया कि नियमों में बदलाव किया गया है और इन नियुक्तियों का प्रावधान किया है। हरियाणा सरकार की इस जानकारी पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया।

हरियाणा सिविल सेवा आफिसर्स एसोसिएशन ने राज्य सिविल सेवा के पदों पर गैर कैडर के अधिकारियों की नियुक्ति को चुनौती दी थी। याची ने कहा कि सरकार द्वारा उठाए गए इस कदम के चलते सिविल सेवा अधिकारियों का प्रशासनिक नियंत्रण समाप्त हो जाएगा। आईएएस और एचसीएस के पदों पर आईपीएस, आईआरएस, एचपीएस व अन्य अधिकारियों को तैनात किया जा रहा है। नियमों के अनुसार कैडर के बाहर से इस प्रकार नियुक्ति नहीं की जा सकती है। 

याचिका पर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार से जवाब मांगा तो बताया गया कि उन्होंने नियमों में संशोधन किया है जिसकेचलते यह याचिका औचित्यहीन हो गई है। अब नए नियमों के तहत सरकार को अधिकार है कि वह कैडर के बाहर से भी नियुक्तियां कर सकती है। इस जानकारी के बाद हाईकोर्ट ने इस याचिका का निपटारा कर दिया।
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