नशे में सेना की महिला अफसर से दुर्व्यवहार के दोषी को बर्खास्त करने के निर्णय को सही करार देते हुए इसके खिलाफ की गई अपील को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट ने कहा कि अनुशासनात्मक बल के सदस्य से ऐसे कार्य की उम्मीद नहीं की जाती और ऐसे में यह सजा भविष्य के लिए उदाहरण पेश करेगी।
याचिका दाखिल करते हुए महेंद्रगढ़ निवासी हीरा सिंह ने हाईकोर्ट को बताया कि वह 1982 में सीआरपीएफ में भर्ती हुआ था और 1999 में उसे चार्जशीट किया गया था। आरोप के अनुसार वह शराब के नशे में था और इस दौरान उसने महिला अफसर के साथ दुर्व्यवहार किया था। सन 2000 में उसे दोषी मानते हुए बर्खास्त करने का आदेश जारी कर दिया गया। इस आदेश को उसने सिविल सूट के माध्यम से चुनौती दी थी और फैसला उसके हक में आया था। इस फैसले को भारत सरकार ने अपील करते हुए चुनौती दी थी।
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भारत सरकार की अपील को स्वीकार करते हुए अपीलेट कोर्ट ने हीरा सिंह की बर्खास्तगी के आदेश को सही करार दिया था। अपीलेट कोर्ट के इस आदेश को हीरा सिंह ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याची ने दलील दी थी कि सेवा के 17 साल के दौरान उसका करियर बेदाग रहा। हाईकोर्ट ने सभी पक्षों को सुनने के बाद कहा कि अनुशासनात्मक बल के सदस्य से इस तरीके से कार्य की उम्मीद नहीं की जाती है। कोर्ट ने कहा कि इस सजा के माध्यम से भविष्य के लिए उदाहरण पेश किया जा सकेगा। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने अपील को सिरे से खारिज कर दिया।