राज्यपाल ने कहा कि सीएम मान को उनका प्रदेश के 10 विश्वविद्यालयों का चांसलर बनना पसंद नहीं है। पंजाब के 10 विश्वविद्यालय ऐसे हैं, जहां रेगुलर वाइस चांसलर नहीं है। राज्यपाल ने कहा कि यूजीसी की गाइडलाइंस हैं कि विश्वविद्यालयों में अगर वाइस चांसलर नियुक्त करना है, तो सर्च कमेटी बनाई जाए। इस सर्च कमेटी में स्टेट और यूजीसी की ओर से नियुक्त लोग होते हैं, जो मेरिट के आधार पर काम करते हैं। उन्होंने कहा कि वह मेरिट पर चलते हैं। पूरा प्रोसेस होने के बाद इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता था, उसमें से सेलेक्शन होती है। राज्यपाल ने कहा, क्योंकि वह किसी के कहने पर काम नहीं करते, इसलिए कुछ लोगों को उनसे हमेशा तकलीफ रहती है, यह बात सब जानते हैं। यहां तक की राज्यपाल ने तमिलनाडु का जिक्र करते हुए कहा कि वहां भी यूजीसी के प्रोसेस के जरिये 27 विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलर नियुक्त किए थे, लेकिन किसी ने आवाज तक नहीं उठाई।
मेरे दौरे से सीएम इतना डरते क्यों हैं, मुझे कोई चुनाव नहीं लड़ना
राज्यपाल ने कहा कि सीएम मान उनके बॉर्डर एरिया के दौरे से इतना क्यों डरते हैं, उन्हें आज तक इसका कारण नहीं पता चला। उन्होंने कहा कि वह अपनी आंखों के सामने प्रदेश की कानून-व्यवस्था को बिगड़ते नहीं देख सकते। प्रदेश में ड्रग्स का बढ़ता कारोबार और तस्करी एक बड़ी समस्या है, जिसको लेकर वह खुद प्राथमिक तौर पर इसे जड़ से खत्म करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। राज्यपाल ने कहा कि मुझसे कांग्रेस, भाजपा, आप और बाकी राजनीतिक दलों के नेता मिलने आते हैं, मैं सबको समय देता हूं। मैं प्रदेश की समस्या को लेकर आगे भी दौरे करूंगा, क्योंकि मुझे कोई चुनाव नहीं लड़ना है, मुझे राजनीति करनी होती तो गवर्नर नहीं बनता। बीते लंबे अरसे से सीएम ने मुझसे किसी भी विषय पर बात तक नहीं की है, मेरी तो सिर्फ प्रधानमंत्री और गृहमंत्री से बातचीत होती है। इस्तीफे को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री मुझे पसंद नहीं करते।